ढाका । बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने भारत के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) पर लोगों को कथित रूप से अवैध तरीके से बांग्लादेश में धकेलने का आरोप लगाया है। बीजीबी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सीमा के रास्ते भेजे गए किसी भी व्यक्ति को बिना निर्धारित प्रक्रिया के स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बीजीबी मुख्यालय के उप महानिदेशक एवं प्रवक्ता कर्नल अबू हसनत मोहम्मद महमूद आजम ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बांग्लादेशी नागरिक होने का दावा करता है तो उसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत निर्धारित सीमा चौकियों पर सत्यापित की जाएगी। सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सीमा पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए बीजीबी पूरी तरह तैयार है। हाल के दिनों में कथित ‘पुश-इन’ घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए ईद-उल-अजहा के दौरान कई जवानों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।
बीजीबी के अनुसार, रविवार देर रात जेस्सोर जिले के शारशा उपजिला स्थित बेनापोल सीमा क्षेत्र में कंटीले तारों की बाड़ के एक गेट से 10 महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को बांग्लादेश में भेजने का प्रयास किया गया। बीजीबी ने हस्तक्षेप कर इस प्रयास को विफल कर दिया। फिलहाल ये लोग सीमा की जीरो लाइन (नो मैन्स लैंड) में फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
बीजीबी का दावा है कि इस मामले के समाधान के लिए बीएसएफ को पत्र भेजा गया, लेकिन सोमवार शाम तक कोई जवाब नहीं मिला। बीजीबी अधिकारियों का कहना है कि बिना औपचारिक प्रक्रिया के बांग्ला भाषी लोगों को बांग्लादेश भेजे जाने के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन पिछले एक महीने में ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है।
जेस्सोर 49 बीजीबी बटालियन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल गुलाम मोहम्मद सैफुल आलम खान ने कहा कि मई महीने में सीमा के विभिन्न क्षेत्रों से इसी तरह की शिकायतें मिली थीं। उनका आरोप है कि कई लोगों को अवैध प्रवासी या बांग्लादेशी घुसपैठिया बताकर सीमा पार भेजने की कोशिश की गई।
बीजीबी के मुताबिक, 24 मई के बाद से ऐसी घटनाओं में तेजी आई है। सतखीरा, चुआडांगा और अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी कई लोगों को हिरासत में लिया गया तथा कथित घुसपैठ के प्रयासों को रोका गया। स्थिति को देखते हुए सीमा क्षेत्रों में गश्त, निगरानी और खुफिया गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं।
