नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार सुबह सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर अथर्ववेद का एक सुभाषितम् साझा करते हुए धरती माता के सद्गुणों का स्मरण किया और उनकी सेवा का संकल्प लेने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने अथर्ववेद के प्रसिद्ध भूमि सूक्त (काण्ड 12, सूक्त 1, मंत्र 17) का श्लोक साझा किया—
“विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥”
उन्होंने बताया कि यह श्लोक धरती माता के प्रति गहरे सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और समस्त विश्व के कल्याण की भावना को व्यक्त करता है।
प्रधानमंत्री की पोस्ट में श्लोक का अर्थ भी साझा किया गया है। इसके अनुसार, सभी प्रकार की श्रेष्ठ वनस्पतियों और औषधियों को धारण करने वाली पृथ्वी माता स्थिर और समृद्ध रहें। विद्या, शौर्य, सत्य और स्नेह जैसे सद्गुणों से पोषित, कल्याणकारी मातृभूमि की हम सदैव सेवा करें।
