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Saturday, May 16, 2026

ऋषभ पंत ने बताया चेन्नई के खिलाफ क्यों नहीं उतरे बल्लेबाजी करने, कहा- ‘ज्यादा सोचना टीम को नुकसान पहुंचा सकता है’

लखनऊ । लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के कप्तान ऋषभ पंत ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच में खुद बल्लेबाजी के लिए न उतरने के फैसले पर बड़ा खुलासा किया है। मैच में लक्ष्य का पीछा करते हुए जब टीम ने लगातार तीन विकेट गंवा दिए थे, तब भी पंत क्रीज पर नहीं आए। मैच के बाद उन्होंने बताया कि यह फैसला उन खिलाड़ियों को मौका देने के लिए था, जिन्हें इस सीजन में ज्यादा खेलने का अवसर नहीं मिला।

188 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए लखनऊ ने 12वें ओवर तक बिना कोई विकेट खोए 135 रन बना लिए थे। इसके बाद टीम ने सिर्फ 9 रन के अंदर अपने तीन मुख्य विकेट गंवा दिए। इसके बावजूद कप्तान पंत बल्लेबाजी के लिए नहीं आए और निकोलस पूरन के बाद अब्दुल समद और मुकुल चौधरी को भेजा गया। हालांकि, अंत में लखनऊ ने यह मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया।

टीम के फैसले का सम्मान करना जरूरी
मैच के बाद कप्तान ऋषभ पंत ने कहा कि वह खुद बल्लेबाजी के लिए पूरी तरह तैयार थे और मैदान पर उतरना चाहते थे। लेकिन टीम मैनेजमेंट की तरफ से यह विचार आया कि जिन खिलाड़ियों को अब तक मौका नहीं मिला है, उन्हें आज आजमाया जाए। पंत ने कहा कि कभी-कभी आपको व्यक्तिगत इच्छा से ऊपर उठकर टीम की सोच और फैसले का सम्मान करना पड़ता है।

इस सीजन में पंत ने हमेशा ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी की है। उन्होंने 11 पारियों में सात बार नंबर-3, तीन बार नंबर-4 और एक बार ओपनिंग की है। चेन्नई के खिलाफ मैच के दौरान भी वह पैड पहनकर डगआउट में बैठे नजर आए थे, लेकिन रणनीति के तहत उन्होंने खुद को पीछे रोका।

ज्यादा रणनीतियां बनीं परेशानी की वजह
लखनऊ की टीम ने इस सीजन में अपनी ओपनिंग जोड़ी में कई बदलाव किए हैं। टीम ने विदेशी खिलाड़ियों को शीर्ष क्रम में उतारने की रणनीति अपनाई थी, लेकिन यह लगातार सफल नहीं हो सकी। इस पर बात करते हुए पंत ने माना कि कई बार बहुत ज्यादा सोचना टीम के प्रदर्शन को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि टीम में क्षमता होने के बावजूद छोटी-छोटी रणनीतिक बातों के कारण योजनाओं को मैदान पर सही तरीके से लागू करना मुश्किल हो जाता है।

यह पहला मौका नहीं है जब पंत ने ड्रेसिंग रूम की रणनीतियों पर खुलकर बात की हो। इससे पहले कोलकाता के खिलाफ सुपर ओवर में मिली हार के बाद भी उन्होंने कहा था कि बहुत ज्यादा दिमाग लगाने से मैदान पर फैसले लेना आसान नहीं रहता।

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