कोलकाता । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। शुक्रवार रात यह बड़ी कार्रवाई की गई है। शांतनु सिन्हा बिस्वास पर मनी लॉन्ड्रिंग, उगाही और जमीन कब्जाने से जुड़े आपराधिक सिंडिकेट में शामिल होने के आरोप हैं, जिसके बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले की जांच के दायरे में अब कोलकाता पुलिस के 12 अन्य पुलिसकर्मी भी आ गए हैं।
ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और उगाही के मामले में गिरफ्तारी के बाद सेवा समाप्ति। डिप्टी कमिश्नर (पूर्व में सिक्योरिटी कंट्रोल डिवीजन और कालीघाट थाना प्रभारी)। 60 वर्ष की आयु के बाद दो वर्ष के सेवा विस्तार पर थे, जिसे सरकार ने अब रद्द कर दिया है। कोलकाता पुलिस के 12 अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी भी केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर।
गंभीर आरोपों के घेरे में डीसी
शांतनु सिन्हा बिस्वास को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता रहा है। ईडी ने कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में 10 घंटे से अधिक की लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि बिस्वास अपराधी बिश्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ और कारोबारी जॉय कामदार के साथ मिलकर एक बड़े उगाही और जमीन कब्जाने वाले गिरोह का संचालन कर रहे थे। जांच एजेंसी को व्हाट्सऐप चैट, वित्तीय लेनदेन और कई डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे इस नेटवर्क की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
कई अन्य घोटालों से भी जुड़े तार
केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अब इस मामले की जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। शांतनु सिन्हा बिस्वास का नाम सिर्फ जमीन कब्जे में ही नहीं, बल्कि अवैध बालू तस्करी, कोयला तस्करी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से जुड़ी अनियमितताओं की जांच में भी सामने आया है। सिंडिकेट की मदद करने के संदेह में कोलकाता पुलिस के 12 अन्य कर्मियों के वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

