नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार सुबह अपने एक्स मंच पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए धैर्य और दृढ़ संकल्प के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सब्र किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत है। यही शक्ति देश को कठिन से कठिन चुनौतियों के बीच भी एकजुट रखती है और लगातार तरक्की, खुशहाली तथा आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
धैर्यवान का मन संकट में भी नहीं डगमगाता
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि युगांत की प्रचंड हवाओं से पर्वत भी हिल सकते हैं, लेकिन दृढ़ निश्चय और धैर्य रखने वाले व्यक्ति का मन कठिन परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता। उन्होंने संस्कृत का यह सुभाषित साझा किया—
“चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः ।
कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः ॥”
इस श्लोक का अर्थ बताते हुए कहा गया कि प्रलयकाल जैसी भीषण आंधी से विशाल पर्वत भी डगमगा सकते हैं, लेकिन धैर्यवान, वीर और विवेकशील व्यक्ति का मन बड़े से बड़े संकट में भी अपने संकल्प से नहीं डिगता। यह संदेश कठिन परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखने, सत्य के मार्ग पर अडिग रहने और अपने लक्ष्य से विचलित न होने की प्रेरणा देता है।
