नई दिल्ली। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) ने खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयास का हिस्सा है।
खेल विज्ञान, चिकित्सा और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
इस समझौते के तहत दोनों संस्थान खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, चोटों की रोकथाम, पुनर्वास, अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगे। दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, आधुनिक आधारभूत संरचना और वैज्ञानिक संसाधनों का उपयोग कर खिलाड़ियों तथा सहयोगी स्टाफ को समग्र और वैज्ञानिक सहायता प्रदान की जाएगी।
समझौते पर हस्ताक्षर खेल मंत्रालय के सचिव हरी रंजन राव और स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुए। साई की ओर से खेल विज्ञान प्रभाग के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक तथा सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर की ओर से निदेशक डॉ. दीपक जोशी ने हस्ताक्षर किए।
ओलंपिक तैयारी को मिलेगी नई मजबूती
खेल मंत्रालय के सचिव हरी रंजन राव ने कहा कि उच्च प्रदर्शन वाले खेलों का भविष्य खेल विज्ञान और खेल चिकित्सा के प्रभावी समन्वय पर निर्भर करता है। यह साझेदारी खिलाड़ियों की निगरानी, चोटों से उबरने, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर विश्वस्तरीय खेल सहायता तंत्र विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक खेलों में खेल चिकित्सा और खेल विज्ञान खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और प्रदर्शन के लिए अनिवार्य हैं। वहीं, ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने बताया कि इस सहयोग से मानकीकृत खेल विज्ञान प्रोटोकॉल, बहु-विषयक अनुसंधान और उन्नत खिलाड़ी सहायता सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. दीपक जोशी ने कहा कि यह समझौता खेल चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और पुनर्वास सेवाओं को नई मजबूती देगा।
यह पहल खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है। इससे भारत की उच्च प्रदर्शन खेल प्रणाली को मजबूती मिलेगी और ओलंपिक, पैरालंपिक सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों की वैज्ञानिक तैयारी को नई गति मिलेगी।
