33.4 C
Kolkata
Saturday, June 13, 2026

ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस: $110 के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड, पश्चिम एशिया में तनाव से गहराया तेल का संकट

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। ईरान द्वारा शांति के नए प्रस्तावों के बावजूद, बाजार में अनिश्चितता का माहौल है, जिससे ब्रेंट क्रूड अब 110 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है।

ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): कारोबार की शुरुआत $108 से हुई, जो देखते ही देखते $109.46 तक जा पहुंची। फिलहाल यह 0.90% की तेजी के साथ $109.20 पर ट्रेड कर रहा है।
WTI क्रूड: अमेरिकी क्रूड भी पीछे नहीं है और $97.55 के स्तर को छू चुका है। इसमें करीब 1% का उछाल दर्ज किया गया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ठप पड़ी सप्लाई
कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का सबसे बड़ा कारण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ का लगभग बंद होना है। दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। शांति वार्ता टलने और दोनों देशों के बीच नाकेबंदी की स्थिति से फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई ठप है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आज युद्ध रुक भी जाए, तो तेल के कुओं को फिर से शुरू करने और रिफाइनरी इन्वेंट्री को बहाल करने में लंबा वक्त लगेगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर खतरे की घंटी
कच्चे तेल की ये बढ़ती कीमतें भारत के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। तेल आयात के लिए डॉलर की बढ़ती मांग भारतीय रुपये को कमजोर कर सकती है। सरकार के ‘करंट अकाउंट डेफिसिट’ (CAD) और फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्यों पर दबाव बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी (Outflow) और ब्याज दरों में संभावित बदलाव से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अगर कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो सरकार को सब्सिडी और एक्सचेंज रेट को लेकर कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।

Related Articles

नवीनतम लेख