रांची । झारखंड में पारंपरिक खनिजों के साथ-साथ अब दुर्लभ खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की खोज, खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियां बड़ा निवेश करने की तैयारी में हैं। इस सिलसिले में मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार और अमेरिकी काउंसलेट जेनरल सुश्री कैली जाइल डियाज के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के बीच प्रोजेक्ट भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में राज्य के खनिज क्षेत्र में मौजूद असीमित संभावनाओं और तकनीकी सहयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्य में मौजूद हैं 20 से अधिक दुर्लभ खनिजों के भंडार
मुख्य सचिव ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया कि झारखंड में कोयला, लोहा, तांबा और बॉक्साइट जैसे पारंपरिक खनिजों के विशाल भंडार तो हैं ही, साथ ही राज्य अब लिथियम, टाइटेनियम, वैनेडियम, सिल्वर और ग्रेफाइट जैसे 20 से अधिक मूल्यवान और दुर्लभ खनिजों के गढ़ के रूप में भी उभर रहा है। इन नए क्षेत्रों में खनिज अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) का काम लगातार जारी है। राज्य सरकार इन बेशकीमती खनिजों के उत्खनन के लिए दुनिया की अग्रणी कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है।
खुली नीलामी में हिस्सा लेगा अमेरिकी माइनिंग ग्रुप ‘यूएसआईएसपीए’
बैठक में अमेरिकी काउंसलेट जेनरल के माध्यम से वहां की कंपनियों को झारखंड के माइनिंग सेक्टर से जुड़ने का न्योता दिया गया। इस दौरान जानकारी दी गई कि अमेरिका की प्रतिष्ठित माइनिंग कंपनियों के समूह यूएसआईएसपीए (USISPA) ने झारखंड सरकार से संपर्क साधा है। यह समूह राज्य में खनिज ब्लॉकों की होने वाली खुली नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने का इच्छुक है और विशेष रूप से दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग और अत्याधुनिक तकनीक साझा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव श्री अरवा राजकमल, खान निदेशक श्री राहुल कुमार सिन्हा और अमेरिकी दूतावास के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
