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Friday, May 8, 2026

भाजपा कार्यकर्ताओं के ‘लहू’ से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल

रांची । झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीतिक सफलता को लेकर विपक्षी दलों पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत किसी चुनाव आयोग की मेहरबानी या ईवीएम की वजह से नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के संघर्ष, खून-पसीने और बलिदान का परिणाम है।

मरांडी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि कुछ लोग अब भी यह मानते हैं कि बंगाल में भाजपा को मिली सफलता चुनाव आयोग का “गिफ्ट” है। उन्होंने कहा कि जो लोग ईवीएम, केंद्रीय बल या दिल्ली के हस्तक्षेप को भाजपा की सफलता का कारण बताते हैं, वे बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों और वहां कार्यकर्ताओं द्वारा झेले गए संघर्ष को नहीं समझते।

उन्होंने लिखा कि “बंगाल में कमल, बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।”

मरांडी ने अपने पोस्ट को चार शीर्षकों में विभाजित करते हुए भाजपा के राजनीतिक संघर्ष और कार्यकर्ताओं पर हुए कथित अत्याचारों का विस्तार से उल्लेख किया। अपने पहले शीर्षक में मरांडी ने कहा कि वर्ष 2011 से 2025 तक का भाजपा का सफर किसी सामान्य राजनीतिक यात्रा जैसा नहीं रहा, बल्कि यह एक “महायज्ञ” था जिसमें कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया, बम से उड़ाया गया और कई कार्यकर्ताओं के शव क्षत-विक्षत हालत में मिले। उन्होंने नंदीग्राम, बीरभूम, कूचबिहार और बशीरहाट का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल भाजपा को वोट देने के कारण गांवों को जलाया गया और लोगों को प्रताड़ित किया गया।

मरांडी ने यह भी कहा कि महिलाओं की अस्मिता को राजनीतिक हथियार बनाकर भय का माहौल बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय की फटकार और सीबीआई जांचों के दस्तावेज तृणमूल कांग्रेस के कथित “खूनी खेल” की गवाही देते हैं।

मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक में भाजपा कार्यकर्ताओं के साहस और मनोबल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, वे भी संघर्ष से पीछे नहीं हटे। उन्होंने उदाहरण देते हुए लिखा कि जिस बूथ अध्यक्ष का शव सुबह पेड़ पर लटका मिलता है, उसका बेटा उसी दिन पोलिंग एजेंट बनकर बूथ पर खड़ा हो जाता है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह साहस ईवीएम या चुनाव आयोग नहीं देता, बल्कि स्वाभिमान और विचारधारा से पैदा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी शासन के 34 वर्षों और तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 वर्षों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने दमन, हिंसा, फर्जी मुकदमे, जेल और सामाजिक बहिष्कार जैसी परिस्थितियों का सामना किया।

तीसरे हिस्से में मरांडी ने बंगाल में भाजपा के राजनीतिक विस्तार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के संघर्ष और माताओं के आंसुओं का इतिहास है। उन्होंने बताया कि 2011 में भाजपा के केवल एक विधायक थे। 2016 में तीन विधायक चुने गए। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 18 सीटें जीतीं और 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 विधायक जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी।

मरांडी ने दावा किया कि 2024 में भारी दमन के बावजूद पार्टी मजबूत बनी रही और 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड जीत हासिल की। उन्होंने इसे उन परिवारों और कार्यकर्ताओं की जीत बताया जिन्होंने लगातार संघर्ष किया।

अपने अंतिम शीर्षक में मरांडी ने कहा कि जो लोग भाजपा की सफलता को “चुनाव आयोग की सेटिंग” बताते हैं, वे उन कार्यकर्ताओं और परिवारों का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने राजनीतिक संघर्ष में अपने प्रियजनों को खोया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की राजनीतिक सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, खून-पसीना और कार्यकर्ताओं की शहादत जुड़ी हुई है।

मरांडी ने लिखा कि “बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहां हर वोट के पीछे एक शहादत छिपी है।” उन्होंने इसे बंगाल के आत्मसम्मान, लोकतंत्र और भाजपा कार्यकर्ताओं के बलिदान की जीत बताया।

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