जमशेदपुर। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अमर शहीद निर्मल महतो के 39वें शहादत दिवस पर शनिवार को जमशेदपुर के उलियान स्थित उनकी समाधि स्थल पहुंचकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें शत-शत नमन किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमर शहीद निर्मल महतो का आदर्श, संघर्ष और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की धरती वीरों की भूमि रही है। राज्य को अलग पहचान दिलाने के लिए लंबे संघर्ष और अनगिनत आंदोलनकारियों के त्याग एवं समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अमर शहीद निर्मल महतो जैसे महान आंदोलनकारियों और मार्गदर्शकों का जीवन समाज को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उनके विचार और आदर्श झारखंड की सामाजिक चेतना और पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य के आदिवासी, मूलवासी, किसान, गरीब और आम नागरिकों के हक-अधिकारों की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक संकल्प है। शहीदों के त्याग, समर्पण और संघर्ष से प्रेरणा लेते हुए समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा। जन-जन को विकास योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ सामाजिक एकजुटता, भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता है।
लोगों की एकजुटता झारखंड की सबसे बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की जनता की एकजुटता और परस्पर सहयोग राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। शहीदों के सपनों के अनुरूप मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध झारखंड के निर्माण के लिए सभी लोगों को मिलकर बिना डरे और बिना रुके आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष 8 अगस्त को सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग अमर शहीद निर्मल महतो की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचते हैं। निर्मल महतो के योगदान को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “जब तक सूरज-चांद रहेगा, निर्मल महतो का नाम रहेगा।” यह नारा आज भी लोगों के भीतर ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के महान आंदोलनकारियों के मार्गदर्शन और संघर्ष ने राज्यवासियों के विश्वास, आशीर्वाद और सामूहिक शक्ति को एकजुट करने का काम किया है। इसी कारण वे झारखंड को ‘वीरों की भूमि’ कहते हैं। इस धरती पर अनेक ऐसे महान व्यक्तित्व हुए, जो आज भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपना जीवन झारखंड और यहां के लोगों के लिए पूरी तरह समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने आदिवासी और मूलवासियों को एकजुट करने, उनके हक-अधिकार की आवाज को मजबूती देने तथा न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके संघर्ष, त्याग और समर्पण को याद रखना और उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
‘एक वीर की कहानी सुनाएंगे तो दूसरे वीरों की कड़ियां जुड़ती जाएंगी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के लोगों की एकजुटता का लोहा पूरा देश मानता है। उन्होंने कहा कि राज्य की इसी एकजुटता और सामूहिक शक्ति को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन झारखंड की जनता को इससे चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। जब-जब बाहरी ताकतों ने यहां के लोगों पर आक्रमण करने का प्रयास किया, तब-तब झारखंडवासियों ने एकजुट होकर उसका मुकाबला किया है।
उन्होंने कहा कि आज सभी लोग वीर शहीद निर्मल महतो के चरणों में शीश झुकाने पहुंचे हैं। कुछ समय पहले ही लंबे समय तक झारखंडवासियों के मार्गदर्शक रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर भी बड़ी संख्या में लोग एकजुट होकर उन्हें नमन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड वीरों की धरती है। यहां एक वीर की कहानी सुनाने पर दूसरे वीरों की संघर्ष गाथाओं की कड़ियां अपने आप जुड़ती चली जाती हैं। शहीद निर्मल महतो सहित झारखंड के तमाम वीरों के विचार और आदर्श आज भी लोगों के जीवन में मार्गदर्शन का काम कर रहे हैं।
शहीदों के आदर्शों पर आगे बढ़ने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद निर्मल महतो और अन्य आंदोलनकारियों ने जिस झारखंड का सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने लोगों से सामाजिक एकता बनाए रखने और राज्य के विकास में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि शहीदों और महान आंदोलनकारियों ने अपने जीवन का बहुमूल्य समय झारखंड के लिए समर्पित किया। उनके सपनों और संघर्षों को आगे बढ़ाना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है। सभी लोग अपने वीर शहीदों और मार्गदर्शकों को प्रेरणा बनाकर जीवन के सफर में मजबूती के साथ बिना डरे और बिना रुके आगे बढ़ते रहें।
कार्यक्रम में विधायक सबिता महतो, विधायक समीर मोहंती, विधायक संजीव सरदार, विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
