चेन्नई। तमिलनाडु सरकार के विभिन्न विभागों में चयनित 401 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटने के लिए चेन्नई में आयोजित सरकारी समारोह एक बेहद भावुक और यादगार पल का गवाह बना। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए, एक 9 महीने की गर्भवती महिला अभ्यर्थी की सुविधा के लिए स्वयं मंच से नीचे उतरकर उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील और मानवीय व्यवहार ने सभागार में मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।
28 जून को है प्रसव तिथि, फिर भी हौसले के साथ पहुंचीं अक्षयलक्ष्मी
सरकारी सेवा के लिए चयनित इन 401 अभ्यर्थियों में अक्षयलक्ष्मी नाम की एक महिला भी शामिल थीं, जो गर्भावस्था के अंतिम चरण (9वें महीने) में हैं। उनकी प्रसव तिथि (डिलीवरी डेट) आगामी 28 जून निर्धारित है। अपनी इस नाजुक शारीरिक स्थिति के बावजूद, सरकारी नौकरी के अपने सपने को पूरा करने और इस खास पल का हिस्सा बनने के लिए वे समारोह में शामिल होने पहुंची थीं।
सीढ़ियां चढ़ने से रोका, खुद चलकर पहुंचे मुख्यमंत्री
समारोह में जब चयनित युवाओं को एक-एक करके मंच पर नियुक्ति पत्र लेने के लिए बुलाया जा रहा था, तभी मुख्यमंत्री विजय की नजर अक्षयलक्ष्मी पर पड़ी। उनकी स्थिति को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिला को मंच तक आने के लिए सीढ़ियां चढ़ने का कष्ट न दिया जाए। इसके तुरंत बाद, सीएम विजय खुद मंच से नीचे उतर आए और सीधे उस स्थान पर पहुंचे जहां अक्षयलक्ष्मी बैठी हुई थीं। मुख्यमंत्री ने बेहद सम्मान के साथ उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा और उनके व उनके होने वाले शिशु के स्वस्थ व उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान अक्षयलक्ष्मी भी अपने आंसू नहीं रोक सकीं।
समावेशी प्रशासन और महिला सशक्तीकरण का बेहतरीन उदाहरण
मुख्यमंत्री के इस कदम को वहां मौजूद अधिकारियों, अतिथियों और अन्य अभ्यर्थियों ने खड़े होकर सराहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह घटना राज्य सरकार की महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सशक्तीकरण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। समारोह में अक्षयलक्ष्मी के अलावा लोकराजन, भूमुगई, मार्टिन, जेनिफा शेरिन, अरुण कुमार, भरत वरुण, खदीजा परवीन, उषा और सुकन्या सहित कुल 401 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को पूरी ईमानदारी और जनसेवा की भावना से काम करने की सीख दी।
मुख्यमंत्री विजय का यह संवेदनशील व्यवहार अब पूरे राज्य में चर्चा और सुशासन के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
