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Thursday, August 13, 2026

40 की उम्र के बाद डायबिटीज वाली महिलाओं को आंखों की जांच में लापरवाही पड़ सकती है भारी

डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। आंखें भी इससे अछूती नहीं हैं। खासकर 40 साल की उम्र के बाद डायबिटीज से जूझ रही महिलाओं के लिए आंखों की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर नजर धुंधली होने से लेकर स्थायी रूप से आंखों की रोशनी जाने तक का खतरा हो सकता है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी में रेटिना की कमजोर रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ या खून का रिसाव होने लगता है। इसका असर धीरे-धीरे देखने की क्षमता पर पड़ता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि शुरुआती चरण में व्यक्ति को सामान्य रूप से दिखाई देता रहता है और उसे यह अंदाजा भी नहीं होता कि आंखों के अंदर गंभीर बदलाव शुरू हो चुके हैं। जब नजर धुंधली होने या अन्य लक्षणों की शिकायत सामने आती है, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी हो सकती है।

40 के बाद क्यों बढ़ जाती है चिंता?

डायबिटीज की अवधि लंबी होने, ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने और नियमित आंखों की जांच नहीं कराने से डायबिटिक रेटिनोपैथी का जोखिम बढ़ सकता है। 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में स्वास्थ्य और हार्मोन से जुड़े बदलावों के बीच नियमित जांच को नजरअंदाज करना समस्या को और गंभीर बना सकता है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को आंखों की जांच को अपनी नियमित स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा बनाना चाहिए।

लक्षण का इंतजार करना पड़ सकता है भारी

डायबिटिक रेटिनोपैथी की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआत में इसके लक्षण बेहद हल्के हो सकते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते। रेटिना की बारीक रक्त वाहिकाओं में बदलाव शुरू होने के बावजूद व्यक्ति को सामान्य नजर आ सकती है। बीमारी जब आंख के महत्वपूर्ण हिस्से मैकुला को प्रभावित करने लगती है, तब धुंधला दिखाई देना, नजर में बदलाव या देखने की क्षमता कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

इसी कारण विशेषज्ञों की सलाह है कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों को केवल लक्षण दिखाई देने पर ही आंखों की जांच कराने के बजाय नियमित रूप से स्क्रीनिंग करानी चाहिए। सामान्य तौर पर कम से कम साल में एक बार आंखों की जांच जरूरी मानी जाती है, जबकि जांच की अवधि व्यक्ति की स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अलग हो सकती है।

जांच से समय रहते पकड़ में आ सकती है बीमारी

डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाने के लिए डाइलेटेड रेटिनल जांच महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर फंडस फोटोग्राफी और ओसीटी जैसी रेटिनल इमेजिंग तकनीकों की मदद भी ली जा सकती है। इन जांचों से रेटिना में होने वाले बदलावों का पता उस समय लगाया जा सकता है, जब मरीज को नजर में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती।

समय पर बीमारी की पहचान होने से चिकित्सक उचित उपचार की योजना बना सकते हैं और आंखों की रोशनी को गंभीर नुकसान से बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

ब्लड शुगर कंट्रोल रखना सबसे जरूरी

डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचाव के लिए केवल आंखों की जांच ही पर्याप्त नहीं है। ब्लड शुगर को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियंत्रित रखना, ब्लड प्रेशर और लिपिड स्तर पर नजर रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और निर्धारित दवाएं समय पर लेना भी महत्वपूर्ण है।

यदि रेटिना में गंभीर बदलाव दिखाई देते हैं तो स्थिति के अनुसार लेजर उपचार या आंख के अंदर दवा देने वाली इंट्राविट्रियल थेरेपी जैसे उपचारों की जरूरत पड़ सकती है। समय पर उपचार बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोकने में मदद कर सकता है।

पुरुषों को भी नहीं करनी चाहिए अनदेखी

डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। डायबिटीज से पीड़ित पुरुषों को भी नियमित आंखों की जांच करानी चाहिए। खासकर लंबे समय से डायबिटीज होने या ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहने की स्थिति में आंखों की जांच को टालना उचित नहीं है।

डायबिटीज के कारण नजर जाना हमेशा अपरिहार्य नहीं है। समय पर स्क्रीनिंग, ब्लड शुगर का बेहतर नियंत्रण और जरूरत पड़ने पर उपचार के जरिए गंभीर दृष्टि हानि के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसलिए 40 की उम्र के बाद डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं के लिए आंखों की नियमित जांच सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य जांच नहीं, बल्कि आंखों की रोशनी बचाने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। डायबिटीज और आंखों से जुड़ी जांच या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक या नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जांच और उपचार की जरूरत अलग हो सकती है।

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