नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया मंच एक्स पर सुभाषितम् साझा करते हुए प्रतिकूल परिस्थितियों में सफलता का मंत्र दिया। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि की रामायण से लिए गए एक श्लोक के माध्यम से दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, निरंतर प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति के जरिए उन्हें अनुकूल बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण के अयोध्याकांड, सर्ग 23 के श्लोक 17 को सुभाषितम् के रूप में साझा किया। श्लोक में भाग्य के बजाय पुरुषार्थ यानी कर्म, प्रयास और मेहनत की शक्ति को महत्व दिया गया है। इसके जरिए यह संदेश दिया गया है कि व्यक्ति अपने दृढ़ प्रयासों से विपरीत परिस्थितियों को भी बदलने की क्षमता रखता है।
यह श्लोक उस प्रसंग से जुड़ा है, जब भगवान श्रीराम को वनवास दिए जाने की बात सामने आती है और लक्ष्मण अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं। इस दौरान लक्ष्मण दैव यानी भाग्य पर निर्भर रहने के बजाय मनुष्य के पुरुषार्थ को अधिक महत्वपूर्ण बताते हैं। उनका संदेश है कि कठिन परिस्थितियों के सामने मनुष्य को निराश होकर बैठने के बजाय कर्म और प्रयास के जरिए उनका सामना करना चाहिए।
प्रधानमंत्री के एक्स हैंडल पर साझा किए गए सुभाषितम् के साथ इसका अर्थ भी दिया गया। इसमें कहा गया कि जो व्यक्ति अपने दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और पुरुषार्थ से प्रतिकूल परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में सक्षम होता है, वह जीवन की बाधाओं से पराजित नहीं होता। वह लगातार प्रयास करता रहता है और अंततः सफलता प्राप्त करता है।
प्रधानमंत्री का यह संदेश विशेष रूप से उन परिस्थितियों में कर्म और आत्मविश्वास की महत्ता को सामने रखता है, जब व्यक्ति को लगातार चुनौतियों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। संदेश के जरिए युवाओं और आम लोगों को कठिनाइयों से घबराने के बजाय निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा दी गई है।
