नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) में महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर देने और जवानों के परिवारों को त्वरित राहत सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार लागू किए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में इन सुधारों का अनावरण किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘जेंडर न्यूट्रल फ्रेमवर्क’ के माध्यम से आईसीजी में महिला अधिकारियों की भर्ती, प्रशिक्षण और स्थायी नियुक्ति में समान अवसर सुनिश्चित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नारी शक्ति को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता पर लगातार काम कर रही है।
महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अवसर
नई नीति के तहत महिला उम्मीदवारों को पुरुषों के समान अल्पकालिक सेवा नियुक्ति और स्थायी नियुक्ति का अवसर मिलेगा। वहीं, अल्पकालिक सेवा का विकल्प अब पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी उपलब्ध होगा।
इसके अलावा, वर्तमान महिला स्थायी अधिकारियों को पात्रता के आधार पर उच्च पदों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा। अल्पकालिक सेवा में कार्यरत महिला अधिकारियों को भी निर्धारित शर्तें पूरी करने पर स्थायी नियुक्ति में शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में लैंगिक समानता को मजबूत करेगा।
लापता जवानों के परिवारों को मिलेगी त्वरित सहायता
दूसरे नीतिगत सुधार के तहत ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले आईसीजी कर्मियों के परिवारों को राहत देने की प्रक्रिया आसान बनाई गई है। अब ऐसे मामलों में अनुग्रह राशि और अन्य सेवा लाभ देने के लिए संबंधित कर्मी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मृत मानने का प्रावधान किया गया है।
इससे शोकाकुल परिवारों को लंबे प्रशासनिक इंतजार से राहत मिलेगी और आर्थिक सहायता तथा अन्य लाभ जल्द उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
आईसीजी की सेवा की सराहना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले पांच दशकों में भारतीय तटरक्षक बल की सेवाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ये नीतिगत सुधार बल का मनोबल बढ़ाने के साथ उसकी कार्यक्षमता को भी मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि 2027 में स्वर्ण जयंती की ओर बढ़ रहे आईसीजी के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है।
