नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई के लिए मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वर्ष 2024 में बने कानून को और अधिक प्रभावी बनाकर विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है।
पेपर लीक पर बढ़ेगी सजा और जुर्माना
संशोधन विधेयक के अनुसार परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों के लिए न्यूनतम सजा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष और अधिकतम सजा दस वर्ष करने का प्रस्ताव है। वहीं अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया जाएगा।
सेवा प्रदाताओं पर भी होगी सख्त कार्रवाई
विधेयक में परीक्षा आयोजन से जुड़े संस्थानों, कंपनियों, साझेदारी फर्मों, ठेकेदारों और तकनीकी सेवा प्रदाताओं को भी कानून के दायरे में लाया गया है। दोषी पाए जाने पर इन पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही परीक्षा संचालन से प्रतिबंध की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है। परीक्षा आयोजन पर हुए खर्च की वसूली भी संबंधित संस्था से की जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों और माफिया पर भी शिकंजा
सरकार ने केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि कंपनियों के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन को भी जवाबदेह बनाने का प्रावधान किया है। दोषी पाए जाने पर उन्हें पांच से दस वर्ष तक की जेल और 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना हो सकता है। यदि किसी संगठित अपराध गिरोह या माफिया की संलिप्तता सामने आती है तो जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक लगाया जा सकेगा।
फास्ट ट्रैक अदालतों में होगा त्वरित निपटारा
विधेयक में ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान किया गया है। जांच दो महीने के भीतर पूरी करने और उसके बाद तीन महीने में मुकदमे का निस्तारण करने का लक्ष्य रखा गया है। अपील केवल उच्च न्यायालय की द्वैधपीठ के समक्ष निर्धारित समय सीमा के भीतर की जा सकेगी।
विशेषज्ञों का कार्यबल कर रहा है निगरानी
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया है। इसमें नंदन नीलेकणि, एस. सोमनाथ, तपन डेका और वी. कामकोटी सहित शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन समिति की 46 प्रमुख सिफारिशों में से लगभग 35 पर अमल किया जा चुका है और सभी दलों से इस संशोधन विधेयक का समर्थन करने की अपील की।
