वाशिंगटन, 19 जून। फ्रांस के पेरिस में अमेरिकी और ईरानी राष्ट्रपतियों के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते के 14 बिंदुओं पर हस्ताक्षर होने के बाद, अगले रणनीतिक कदमों पर बातचीत के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस गुरुवार रात स्विट्जरलैंड के लिए रवाना नहीं हुए। व्हाइट हाउस ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। हालांकि, इस समझौते के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से चला आ रहा तनाव काफी हद तक कम हो गया है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत का रास्ता साफ हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, जहाजों की आवाजाही में तेजी
सीबीएस न्यूज और अल जजीरा की रिपोर्टों के अनुसार, उपराष्ट्रपति वेंस की यात्रा स्थगित होने का क्षेत्र की समुद्री स्थिति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है:
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आवागमन बहाल: दोनों राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तेल टैंकरों और कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया गया है।
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व्यापार में तेजी: मार्ग खुलते ही इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से जहाजों के आवागमन में अचानक भारी तेजी दर्ज की गई है।
वार्ता की योजना अभी तय नहीं: व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत शुरू करने के लिए स्विट्जरलैंड नहीं गए हैं। प्रवक्ता ने वेंस के पिछले बयानों का हवाला देते हुए साफ किया कि दोनों देशों के बीच होने वाली तकनीकी बातचीत (Technical Talks) की योजना अभी पूरी तरह तय नहीं हुई है। हालांकि, दोनों ही पक्ष जल्द ही इस तकनीकी वार्ता को शुरू करने की रूपरेखा बना रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को दी ब्रीफिंग
इस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम के बीच, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के वरिष्ठ नेताओं को इस समझौते की बारीकियों से अवगत कराया है:
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फोन पर चर्चा: व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाउस और सीनेट के शीर्ष नेताओं को फोन कर इस समझौते की पूरी रूपरेखा समझाई।
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वरिष्ठ सांसद शामिल: इस ब्रीफिंग में सीनेट की विदेश संबंध समिति, हाउस की विदेश मामलों की समिति के शीर्ष सांसदों के अलावा सीनेट में बहुमत दल के नेता जॉन थ्यून और अल्पसंख्यक दल के नेता चक शूमर शामिल रहे। अधिकारियों ने आगामी वार्ताओं को लेकर सांसदों के सवालों के सीधे जवाब भी दिए।
इजरायल का विरोध और समुद्री मोर्चे पर नया बदलाव
समझौते के बाद क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा मोर्चे पर भी बड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:
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नेतन्याहू का कड़ा रुख: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद, दक्षिणी लेबनान में बने अपने सुरक्षा क्षेत्र से इजराइली सेना (IDF) को हटाने का कड़ा विरोध किया है। वहीं दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने मांग की है कि इजराइली सेना को तत्काल लेबनान की जमीन छोड़नी होगी। (नोट: मूल समाचार में नेतन्याहू को ‘ईरान का प्रधानमंत्री’ लिखा गया है, जो तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है; वे इजरायल के प्रधानमंत्री हैं।)
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नाकाबंदी हटी: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि उसने ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी सैन्य नाकाबंदी को पूरी तरह हटा लिया है।
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परमिट की जिम्मेदारी: तेहरान की ओर से बयान जारी किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों को परमिट जारी करने का जिम्मा अब उसकी ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ को सौंप दिया गया है।
