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Friday, June 19, 2026

तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विवाद वित्तीय मोर्चे पर पहुंचा: बैंक खाते फ्रीज कराने पुलिस के पास पहुंचे ऋतब्रत गुट के विधायक

कोलकाता, 19 जून। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी आंतरिक संघर्ष अब पार्टी के विशाल फंड पर नियंत्रण और वित्तीय मोर्चे तक आ पहुंचा है। पार्टी नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच, विद्रोही नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक विधायकों ने पार्टी के बैंक खातों से किसी भी प्रकार के लेनदेन पर रोक लगाने की मांग करते हुए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है।

बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय में लिखित शिकायत दर्ज

गुरुवार देर शाम ऋतब्रत गुट के कई विधायकों ने बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के संबंधित थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।

  • वास्तविक प्रतिनिधि होने का दावा: विधायकों ने पत्र में स्वयं को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधि बताया है।

  • खाते फ्रीज करने की मांग: शिकायत में उन सभी बैंक खातों की जानकारी दी गई है जिनमें पार्टी का फंड जमा है। विधायकों ने मांग की है कि मौजूदा राजनीतिक विवाद और नेतृत्व संकट को देखते हुए इन खातों को तत्काल फ्रीज किया जाए।

  • दुरुपयोग की आशंका: विद्रोही गुट का कहना है कि पार्टी के भीतर गंभीर मतभेद होने के कारण वर्तमान स्थिति में पार्टी फंड के दुरुपयोग की प्रबल आशंका है।

पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने भी जताई आपत्ति

इससे पहले पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और राज्य के पूर्व मंत्री अरूप विश्वास भी बैंक खातों से धन निकासी रोकने की मांग कर चुके हैं।

  • संगठनात्मक फेरबदल: गत 5 जून को अरूप विश्वास को पद से हटाकर पूर्व सांसद शुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

  • बैंक को लिखा पत्र: इसके बावजूद अरूप विश्वास ने 12 जून को बैंक प्रबंधन को पत्र लिखकर खातों में यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने की मांग की, जिसे बैंक ने 16 जून को स्वीकार किया।

  • चेक के दुरुपयोग का डर: अरूप विश्वास ने आशंका जताई है कि कोषाध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने जिन चेकों पर पहले से हस्ताक्षर किए थे, उनका मौजूदा परिस्थितियों में गलत इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के 20 सांसद और 58 विधायक वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर चुके हैं।

675 करोड़ रुपये के फंड पर नियंत्रण की लड़ाई

पार्टी के भीतर इस वित्तीय रस्साकशी की मुख्य वजह तृणमूल कांग्रेस का बड़ा पार्टी फंड है। चुनाव आयोग (Election Commission) को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी फंड में लगभग 675 करोड़ रुपये जमा हैं। इतनी बड़ी राशि पर नियंत्रण को लेकर ही अब कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है।

दो फाड़ की स्थिति में पार्टी

  • विधानसभा में विभाजन: ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल विधायक दल में पहले ही विभाजन हो चुका है। शोभनदेव चटर्जी को विपक्ष का नेता बनाए जाने का विरोध करते हुए ऋतब्रत ने 59 विधायकों के समर्थन का दावा किया था, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें विपक्ष का नेता घोषित कर दिया।

  • संसद (दिल्ली) में टूट: दिल्ली में भी पार्टी के संसदीय दल में दरार की खबरें हैं। काकली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में 28 सांसदों के त्रिपुरा की एक क्षेत्रीय पार्टी में शामिल होने के दावे किए जा रहे हैं।

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