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Tuesday, June 2, 2026

बच्चों के दिल को छूने वाला रोमांचक सफर है एनीमेशन फिल्म ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’

रांची । ऐसे दौर में जब बच्चों के लिए बनने वाली अधिकांश सिनेमाई फिल्में केवल तकनीकी चकाचौंध, वीएफएक्स और तेज-तर्रार सतही मनोरंजन तक सीमित होती जा रही हैं, निर्देशक वैभव कुमारेश की नई एनीमेशन फिल्म ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ एक सुखद और बेहतरीन अपवाद बनकर सामने आई है। साढ़े तीन स्टार (3.5/5 Rating) की रेटिंग वाली यह फिल्म न केवल बच्चों का भरपूर मनोरंजन करती है, बल्कि उन्हें खेल-खेल में जीवन के बेहद महत्वपूर्ण और नैतिक मूल्यों से भी परिचित कराती है। भारतीय लोककथाओं और पारिवारिक रिश्तों के ताने-बाने से बुनी यह फिल्म बच्चों के साथ-साथ बड़े दर्शकों को भी भावुक कर देती है।

पंचतंत्र की कहानियों के जरिए दादाजी ने जगाया बच्चों का आत्मविश्वास

फिल्म की कहानी मुख्य किरदार मिहिर और उसके स्कूली दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो स्कूल में एक दबंग और शरारती लड़के की हरकतों से काफी परेशान रहते हैं। अपनी इस रोज-रोज की समस्या का समाधान खोजने के लिए वे मिहिर के समझदार दादाजी के पास पहुंचते हैं। दादाजी बच्चों को कोई सीधा उपदेश देने के बजाय उन्हें जंगल और वहां रहने वाले जीव-जंतुओं की बेहद रोचक कहानियां सुनाना शुरू करते हैं। इन कहानियों में भारतीय लोककथाओं और ‘पंचतंत्र’ की खूबसूरत झलक दिखाई देती है। हर कहानी के माध्यम से बच्चों को दोस्ती, साहस, धैर्य और सही समय पर सही निर्णय लेने की सीख मिलती है, जिससे अंततः उनका खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौट आता है।

सरल निर्देशन, जीवंत एनीमेशन और लोकधुनों का शानदार संगम

फिल्म के लेखक, कहानीकार और निर्देशक वैभव कुमारेश ने पूरी पटकथा को बेहद सरल, सहज और दिलचस्प अंदाज़ में पर्दे पर उतारा है, जिससे फिल्म कहीं भी बोझिल नहीं लगती। फिल्म का एनीमेशन रंगों और जीवंत दृश्यों से भरपूर है, जिसमें प्राकृतिक वातावरण, जंगल और पशु-पक्षियों को बहुत ही आकर्षक ढंग से दिखाया गया है। भले ही इसका विजुअल स्केल अंतरराष्ट्रीय फिल्मों जितना भव्य न हो, लेकिन इसकी आत्मा और भावनात्मक जुड़ाव इसे बेहद खास बना देते हैं। निर्माता सुरंजना कुमारे के सहयोग और लोकधुनों से सजे भारतीय संगीत के बैकग्राउंड स्कोर ने फिल्म के दृश्यों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है।

फाइनल वर्डिक्ट: पूरे परिवार के साथ देखने लायक एक सार्थक फिल्म

‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी सादगी, ईमानदारी और सकारात्मक संदेश है। दादाजी और बच्चों के बीच का आत्मीय रिश्ता कहानी में गजब की गर्माहट भरता है, जो बड़े दर्शकों को भी उनके बचपन के सुनहरे दिनों और दादा-दादी की कहानियों की याद दिला देता है। यह फिल्म किसी भारी-भरकम एक्शन या चौंकाने वाले ट्विस्ट पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी साफ-सुथरी कहानी के दम पर आगे बढ़ती है। कुल मिलाकर, यह फिल्म बच्चों के लिए मनोरंजन और सीख का एक शानदार संगम है, जिसे इस वीकेंड पर पूरे परिवार के साथ सिनेमाघरों में एक साथ बैठकर देखा जा सकता है।

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