नई दिल्ली | पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते सैन्य और कूटनीतिक संकट का सीधा असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। शुरुआती कारोबार में ही ब्रेंट क्रूड 96.27 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गया।
बाजार में हड़कंप: 6.5% से ज्यादा की बढ़त
सप्लाई चेन पर मंडराते खतरों की वजह से निवेशकों में डर का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) में 6.5 प्रतिशत की भारी तेजी देखी गई है, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 7.5 प्रतिशत की उछाल के साथ 90 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
वैश्विक तेल व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और संभावित समुद्री नाकेबंदी की खबरों ने तेल की सप्लाई रुकने का खतरा पैदा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि अगर यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात निर्भर देशों पर पड़ेगा।
बाजार के मौजूदा आंकड़े:
WTI क्रूड: $89.05 प्रति बैरल (6.20% की बढ़त)
ब्रेंट क्रूड: $95.19 – $96.27 प्रति बैरल के बीच ट्रेंड
विशेषज्ञों की राय: पश्चिम एशिया में अस्थिरता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। यदि होर्मुज मार्ग पूरी तरह प्रभावित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

