कोलकाता । पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा घटाए जाने के बाद अब कई अन्य तृणमूल नेताओं और पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा भी कम कर दी गई है। राज्य सरकार ने कई नेताओं के आवासों के बाहर तैनात अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को हटाने के साथ-साथ बैरिकेड भी हटा दिए हैं।
इन बड़े नेताओं की सुरक्षा में हुई कटौती
जिन नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है उनमें तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं राज्य के पूर्व डीजी राजीव कुमार, वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय और विधायक कुणाल घोष के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। जानकारी के अनुसार कुल 10 तृणमूल नेताओं और पूर्व मंत्रियों के आवासों पर तैनात सुरक्षा बलों की संख्या घटाई गई है।
अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में पहले ही हुआ था बदलाव
इससे पहले भाजपा सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया था। तृणमूल शासन के दौरान उनके हरिश चटर्जी स्ट्रीट स्थित आवास को कड़ी सुरक्षा घेरे में रखा गया था। उस समय विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे कि केवल सांसद होने के बावजूद उन्हें इतनी व्यापक सुरक्षा क्यों दी गई थी, जबकि वे मंत्री भी नहीं थे।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार अब अभिषेक बनर्जी को सांसद के तौर पर निर्धारित सुरक्षा ही उपलब्ध कराई जाएगी। इसी तरह सोमवार सुबह यह जानकारी सामने आई कि तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी, विधानसभा में वर्तमान नेता प्रतिपक्ष शोभनदेव चट्टोपाध्याय और विधायक कुणाल घोष के आवासों के बाहर लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड हटा दिए गए हैं।
सुरक्षा नियमों के तहत की गई कार्रवाई
इसके अलावा वरिष्ठ तृणमूल नेताओं चंद्रिमा भट्टाचार्य, अरूप विश्वास और सुब्रत बक्शी की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई है और कई मामलों में सुरक्षा घटाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि तृणमूल शासन के दौरान कई नेताओं को आवश्यकता से अधिक सुरक्षा प्रदान की गई थी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब राजीव कुमार और कल्याण बनर्जी को सांसदों के लिए निर्धारित सुरक्षा मिलेगी। कुणाल घोष विधायक होने के नाते विधायक स्तर की सुरक्षा प्राप्त करेंगे। वहीं अरूप विश्वास और शोभनदेव चट्टोपाध्याय अब मंत्री नहीं हैं। अरूप विश्वास चुनाव भी हार चुके हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था को उसी अनुरूप संशोधित किया गया है।
इसी क्रम में राज्य के सुरक्षा निदेशक पीयूष पांडे की सुरक्षा की भी समीक्षा की गई है। बताया गया है कि पूर्व कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक रहे पीयूष पांडे की सुरक्षा में भी कटौती की गई है।

