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Saturday, July 25, 2026

सचिन सिवाच की नजर अब राष्ट्रमंडल खेलों के पदक पर, बोले- सर्वश्रेष्ठ देना ही लक्ष्य

मुंबई । हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले भारत के उभरते स्टार मुक्केबाज सचिन सिवाच अब राष्ट्रमंडल खेल 2026 में अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार हैं। 26 वर्षीय सचिन इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (आईआईएस) से जुड़े हैं। वह ग्लासगो में भारत के सबसे प्रबल पदक दावेदारों में शामिल हैं।

सचिन ने 2025 में इतिहास रचते हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बनने का गौरव हासिल किया था। इसके बाद भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा। वर्ष 2026 में उन्होंने चेक गणराज्य के ग्रां प्री उस्ती नाद लाबेम और स्पेन के बॉक्साम एलीट इंटरनेशनल टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता, जबकि एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया।

राष्ट्रमंडल खेलों में उतरने से पहले सचिन ने कहा कि भारत की जर्सी पहनकर खेलना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने शुक्रवार को इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (आईआईएस) की ओर से जारी एक बयान में कहा, “भारत का प्रतिनिधित्व करना हमेशा मेरे लिए सबसे बड़ा गौरव है। हर टूर्नामेंट खास होता है, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है। मैंने इस मौके के लिए कड़ी मेहनत की है और मेरा लक्ष्य हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देना, देश को गौरवान्वित करना और रिंग से यह संतोष लेकर बाहर आना है कि मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया।”

तकनीकी सुधार पर रहा पूरा फोकस

सचिन ने बताया कि पिछले दो वर्षों की सफलता के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी गति, टाइमिंग, मूवमेंट और रिंग अवेयरनेस को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा, “इस स्तर पर जीत और हार का अंतर बहुत कम होता है। इसलिए हर मुकाबले में अनुशासन बनाए रखना और रणनीति को सही तरीके से लागू करना बेहद जरूरी है। हमारी तैयारी शानदार रही है और मैं प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार हूं।”

‘एक-एक मुकाबले पर रहेगा ध्यान’

सचिन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है, इसलिए वह किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हल्के में नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस स्तर पर हर मुकाबला कठिन होता है। मैं आगे की नहीं, सिर्फ अगले मुकाबले की सोच रहा हूं। यदि मैं शांत रहकर अपनी ताकत के अनुसार मुक्केबाजी कर पाया और अपनी रणनीति पर अमल किया तो मुझे भरोसा है कि मैं शानदार प्रदर्शन कर सकता हूं।”

आईआईएस को दिया सफलता का श्रेय

सचिन ने अपनी सफलता में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (आईआईएस) की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, रिकवरी सुविधाएं और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण वातावरण ने उन्हें एक बेहतर मुक्केबाज बनने में काफी मदद की है।

भारत की मुक्केबाजी टीम ने राष्ट्रमंडल खेलों में सकारात्मक शुरुआत की है और अब सचिन सिवाच की नजर अपने बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय फॉर्म को ग्लासगो में पदक में बदलने पर होगी।

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