27.5 C
Kolkata
Friday, July 24, 2026

आईआईटी जोधपुर के शोध से याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य को मिलेगा नया आधार

जोधपुर । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर की कॉग्निटिव ब्रेन डायनेमिक्स लैब (सीबीडीएल) मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने के लिए अत्याधुनिक शोध कर रही है। इस शोध से भविष्य में याददाश्त कमजोर होने के शुरुआती संकेतों की पहचान, मानसिक स्वास्थ्य सुधार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नई तकनीकों के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।

मस्तिष्क तरंगों से बीमारियों की पहचान पर शोध

स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस के प्रोफेसर दीपांजन रॉय के नेतृत्व में चल रहे इस शोध में ध्यान, स्मृति, भावनाओं, भाषण समझने की क्षमता और बदलती परिस्थितियों में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है।

भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित विभिन्न राष्ट्रीय परियोजनाओं के तहत किए जा रहे इस शोध का उद्देश्य तंत्रिका विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक मस्तिष्क इमेजिंग तकनीकों को एक साथ जोड़कर नई स्वास्थ्य तकनीकों का विकास करना है।

प्रोफेसर दीपांजन रॉय ने कहा कि मानव मस्तिष्क दुनिया की सबसे जटिल प्रणालियों में से एक है। शोध के माध्यम से ऐसे वैज्ञानिक सिद्धांत विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो मानसिक स्वास्थ्य, स्मृति, संचार क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकें।

याददाश्त में कमी के शुरुआती संकेत मिलेंगे

आईआईटी जोधपुर की टीम ईईजी, एमईजी और आधुनिक संगणकीय तकनीकों की मदद से उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क में होने वाले बदलावों का अध्ययन कर रही है। शोध का लक्ष्य ऐसे शुरुआती संकेतों की पहचान करना है, जिनसे स्मृति ह्रास और मानसिक क्षमताओं में गिरावट का पहले से अनुमान लगाया जा सके।

इससे हल्की संज्ञानात्मक कमी और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान तथा उपचार में मदद मिल सकती है।

मानसिक विकारों के उपचार में मिलेगी मदद

शोधकर्ता वास्तविक जीवन जैसी परिस्थितियां तैयार कर यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि मस्तिष्क भावनाओं को कैसे नियंत्रित करता है। इससे अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक विकारों की पहचान के लिए नए जैविक संकेत विकसित किए जा सकते हैं।

शोध में यह भी सामने आया है कि हल्की विद्युत उत्तेजना के जरिए मस्तिष्क की सुनने और देखने से जुड़ी सूचनाओं को जोड़ने की प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सकता है। ब्रेन वेव्स के अध्ययन से सुनने और समझने की क्षमता से जुड़े बदलावों को समझने में मदद मिल रही है, जो भविष्य में आधुनिक श्रवण उपकरणों के विकास में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

खतरों पर मस्तिष्क की प्रतिक्रिया का अध्ययन

प्रयोगशाला में यह भी शोध किया जा रहा है कि अचानक सामने आने वाले खतरों के समय मस्तिष्क किस तरह प्रतिक्रिया देता है। वैज्ञानिकों ने ऐसे मस्तिष्कीय नेटवर्क और तरंगों की पहचान की है, जो जरूरी और गैर-जरूरी संकेतों में अंतर कर ध्यान केंद्रित करने में सहायता करते हैं।

यह शोध भविष्य में ध्यान संबंधी विकारों, विशेषकर एडीएचडी, के उपचार के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।

Related Articles

नवीनतम लेख