चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सड़क सुरक्षा अभियान तेज कर दिया है। अभियान के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग, पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग अपने-अपने अधीनस्थ मार्गों पर चेतावनी बोर्ड, दिशा-सूचक संकेतक और सड़क सुरक्षा संबंधी संदेश स्थापित कर रहे हैं।
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस
जिला प्रशासन के अनुसार दुर्घटना संभावित स्थलों, तीव्र मोड़ों, पुल-पुलियों, विद्यालयों, अस्पतालों और अधिक यातायात वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से सड़क सुरक्षा संकेतक लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को समय रहते सतर्क करना और सड़क हादसों में कमी लाना है।
उपायुक्त ने की नियमों के पालन की अपील
जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग यातायात नियमों का ईमानदारी से पालन करें तो अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, “दो मिनट की देरी मंजूर है, लेकिन सुरक्षित घर पहुंचना सबसे जरूरी है। घर पर आपका कोई अपना आपका इंतजार कर रहा है।”
हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा पर जोर
उपायुक्त ने दोपहिया, चारपहिया, मालवाहक और यात्री वाहनों के चालकों से हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने तथा नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना का असर केवल पीड़ित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ यात्रा करनी चाहिए।
जिला प्रशासन का मानना है कि सड़क सुरक्षा संकेतकों की स्थापना, नियमित जनजागरूकता अभियान और आम लोगों के सहयोग से सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सकती है।
