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Sunday, August 16, 2026

20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव, छात्र आंदोलन पर आमने-सामने सत्ता और विपक्ष

रांची। जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच और पिछले नौ वर्षों में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की घोषणा की है। स्वतंत्रता दिवस के दिन छात्रों की ओर से की गई इस घोषणा के बाद झामुमो, भाजपा, राजद और भाकपा माले ने आंदोलन को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। सत्तारूढ़ दलों ने छात्रों से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है, जबकि भाजपा ने आंदोलन को नैतिक समर्थन देते हुए सरकार पर छात्रों की प्रमुख मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि झारखंड में अपनी बात रखने, धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना छात्रों का अधिकार है और सरकार उनकी बात सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलनरत छात्रों को दबाने के लिए न तो लाठी चलाती है और न ही बल प्रयोग में विश्वास करती है। हालांकि, उन्होंने छात्रों से आंदोलन की जगह संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।

मनोज पांडे ने कहा कि आंदोलनरत छात्र दिग्भ्रमित न हों और अपने हितों को ध्यान में रखें। उनके अनुसार, कुछ कोचिंग संस्थानों के संचालक छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र राज्य के ही युवा हैं और सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर है। संवाद के माध्यम से ही किसी भी गतिरोध का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

वहीं, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप ने छात्र आंदोलन को उनके भविष्य से जुड़ा स्वतःस्फूर्त आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा छात्रों के आंदोलन को नैतिक समर्थन दे रही है। उन्होंने सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें छात्रों की 95 प्रतिशत मांगें मान लिए जाने की बात कही जा रही है।

योगेंद्र प्रताप ने कहा कि छात्रों की सबसे प्रमुख मांग पूरे मामले की सीबीआई जांच है, जिसे सरकार स्वीकार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को अपनी कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है तो सीबीआई जांच कराने में उसे हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। उन्होंने झामुमो की ओर से छात्रों को दिग्भ्रमित नहीं होने की सलाह दिए जाने को भी हास्यास्पद बताया।

राजद की प्रदेश उपाध्यक्ष अनीता यादव ने छात्रों से आंदोलन के साथ सरकार की परिस्थितियों को भी समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से सरकार और सत्तारूढ़ दल छात्रों के साथ खड़े हैं। उनकी मांगों को समझने और समाधान निकालने की कोशिश की गई है तथा कई मांगें मानी भी गई हैं। उन्होंने कहा कि जो मांगें व्यावहारिक रूप से पूरी नहीं हो सकतीं, उनके लिए लगातार दबाव बनाना उचित नहीं होगा।

भाकपा माले के प्रदेश समिति सदस्य शुभेन्दु सेन ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की कई मांगें मान ली हैं, जबकि कुछ मांगें अभी अधूरी हैं। इन मांगों को पूरा कराने के लिए छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखना चाहिए।

शुभेन्दु सेन ने यह भी माना कि छात्रों की मांगों को स्वीकार करने में हेमंत सरकार कुछ हद तक कंजूसी कर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में राज्य सरकार को उदारता दिखाते हुए छात्रों की जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि आंदोलन समाप्त हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और केंद्र सरकार राज्य सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है।

इस तरह 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की बात कर रहा है। दूसरी ओर, भाजपा सरकार पर सीबीआई जांच से बचने का आरोप लगाकर छात्रों के पक्ष में खड़ी है।

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