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Wednesday, July 29, 2026

सुक्खू सरकार की नई तबादला नीति, दुर्गम क्षेत्रों में तीन साल की सेवा अनिवार्य

शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की तबादला नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कठिन, जनजातीय, हार्ड और अति दुर्गम क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सेवा अवधि के नियम सख्त कर दिए हैं। अब इन क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को निर्धारित तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा किए बिना स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। कार्मिक विभाग ने व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) के पैरा 16.1 में संशोधन कर नई व्यवस्था लागू की है।

सरकार के अनुसार, पुराने प्रावधानों की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही थी। कर्मचारियों द्वारा पसंदीदा स्थानों के विकल्प और तबादलों को लेकर कई अस्पष्टताएं सामने आ रही थीं। इसलिए नियमों को स्पष्ट करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि तबादले केवल प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित को ध्यान में रखकर किए जाएंगे।

दो सर्दियां और तीन गर्मियां पूरी करना होगा

नई नीति के तहत तीन वर्ष के कार्यकाल का अर्थ केवल कैलेंडर के तीन साल नहीं होगा, बल्कि कर्मचारी को संबंधित दुर्गम क्षेत्र में दो सर्दियां और तीन गर्मियां वास्तविक रूप से सेवा देते हुए पूरी करनी होंगी। यदि कोई कर्मचारी लंबी छुट्टी, चिकित्सा अवकाश या किसी अन्य कारण से लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो वह अवधि सेवा कार्यकाल में नहीं जोड़ी जाएगी। लौटने के बाद उसे उतनी अतिरिक्त अवधि उसी क्षेत्र में कार्य करना होगा।

सरकार का मानना है कि कई कर्मचारी कठिन क्षेत्रों में तैनाती से बचने के लिए लंबे अवकाश का सहारा लेते हैं, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ता है। किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा के पांगी क्षेत्र सहित कई दुर्गम इलाकों में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।

अतिरिक्त कार्यभार को नहीं माना जाएगा नियमित सेवा

संशोधित नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी किसी कठिन या जनजातीय क्षेत्र में केवल अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहा है और उसकी नियमित तैनाती वहां नहीं है, तो उस अवधि को सेवा कार्यकाल का हिस्सा नहीं माना जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को तबादला नीति के तहत मिलने वाली वरीयता, प्रोत्साहन या अन्य लाभ भी नहीं मिलेंगे।

55 वर्ष से अधिक आयु वालों को राहत

सरकार ने 55 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत देते हुए कहा है कि जहां तक संभव होगा, उन्हें कठिन और अति दुर्गम क्षेत्रों में तैनात नहीं किया जाएगा। हालांकि, यह छूट पदोन्नति के मामलों में लागू नहीं होगी। यदि पदोन्नति के कारण ऐसी तैनाती होती है, तो कर्मचारी को वहां कार्यभार संभालना होगा।

कार्मिक विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थानों को संशोधित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

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