हावड़ा । एक छोटे और गुमनाम राजनीतिक दल से रातोंरात देश की सियासत के केंद्र में आई नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को लेकर आम जनता और राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता चरम पर है. रविवार रात को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने की सनसनीखेज खबर के बाद से ही यह गुमनाम दल लगातार सुर्खियों में बना हुआ है.
हावड़ा के सांकराइल स्थित हाटगाछा क्षेत्र में बने इस पार्टी के मुख्यालय को लेकर मंगलवार को भी दिनभर चर्चाओं और कयासों का बाजार गर्म रहा. इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के साथ ही पार्टी के संस्थापक कुंडू दंपत्ति— अधिवक्ता शिउली कुंडू और उनके पति उत्तीय कुंडू— अचानक राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गए हैं.
दो-मंजिला इमारत ‘जागो विश्व’ से चल रही देश की बड़ी सियासत
बकुलतला बी गार्डेन गेट से नाजिरगंज होते हुए हाटगाछा एन.सी. पाल पोल के पास स्थित हरे रंग की एक दो-मंजिला इमारत इस समय कौतूहल का मुख्य केंद्र बनी हुई है. चारदीवारी से घिरे इस भवन के ऊपर बड़े अक्षरों में ‘जागो विश्व’ लिखा है.
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एनजीओ से राजनीतिक मुख्यालय: स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस इमारत को अब तक लोग एक स्वयंसेवी संस्था (NGO) के दफ्तर के रूप में जानते थे. किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इसी शांत परिसर से इतनी बड़ी राजनीतिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं.
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बढ़ी सुरक्षा: सांसदों के शामिल होने की खबर के बाद से ही इस कार्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है.
कौन हैं शिउली कुंडू और उत्तीय कुंडू?
एनसीपीआई की स्थापना महज चार साल पहले वर्ष 2022 में हुई थी. इसके संस्थापकों का प्रोफाइल बेहद दिलचस्प है:
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शिउली कुंडू: पेशे से अधिवक्ता (वकील) हैं और पार्टी की मुख्य नीति निर्धारकों में शामिल हैं.
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उत्तीय कुंडू: शिउली कुंडू के पति हैं, जो सामाजिक कार्यों के लिए एक एनजीओ चलाने के साथ-साथ ‘जागो विश्व’ नामक समाचार पत्र के संपादक भी हैं.
2023 के पंचायत चुनाव में ली थी एंट्री: यह दल क्षेत्र के लिए बिल्कुल नया नहीं है. वर्ष 2023 के पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों के दौरान इस संगठन ने स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई थी और स्थानीय झोड़हाट ग्राम पंचायत में बाकायदा अपने उम्मीदवार भी उतारे थे.
‘पड़ोसी’ पत्रकार और यूट्यूबर भी रह गए हैरान
कुंडू दंपत्ति के अचानक इस तरह चर्चा में आने से उनके जानने वाले और पड़ोसी भी हैरान हैं.
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स्थानीय यूट्यूबर राज मल्लिक ने बताया कि वे उत्तीय बाबू को एक एनजीओ संचालक के रूप में जानते थे, लेकिन वे किसी राजनीतिक दल के संस्थापक हैं, यह बात उन्हें अब पता चली.
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वहीं, उनके घर के पास रहने वाले स्थानीय पत्रकार दिव्येंदु घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके घर के पास ही एनसीपीआई का मुख्यालय है, लेकिन उन्होंने आज से पहले इस पार्टी का नाम तक नहीं सुना था.
फिलहाल दोनों के फोन बंद
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और सांसदों के शामिल होने के बाद से ही कुंडू दंपत्ति का पक्ष जानने के लिए कई बार उनसे फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों के ही मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहे हैं. फिलहाल, हाटगाछा जैसे उपनगरीय इलाके की चाय दुकानों से लेकर घरों तक सिर्फ इसी बात की चर्चा है.
