नई दिल्ली । केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश में दवाओं की बिक्री और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला लिया है. मंत्रालय ने मंगलवार को ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए छोटे गांवों में कफ सिरप (खांसी की दवा) की खुली बिक्री पर मिलने वाली सालों पुरानी छूट को पूरी तरह खत्म कर दिया है. अब देश के छोटे से छोटे गांवों में भी बिना वैध लाइसेंस के कफ सिरप नहीं बेची जा सकेगी.
क्या था पुराना नियम और अब क्या बदला?
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक अधिसूचना (Notification) के मुताबिक:
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पहले का नियम: अब तक देश के जिन गांवों की आबादी 1,000 से कम थी, वहां कफ सिरप और कुछ अन्य सामान्य दवाओं की बिक्री के लिए लाइसेंस के कड़े प्रावधानों से छूट दी गई थी, ताकि ग्रामीण इलाकों में बुनियादी दवाएं आसानी से मिल सकें.
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नया संशोधन: सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए संबंधित प्रविष्टि (Entry) से “सिरप” शब्द को ही हटा दिया है. इस तकनीकी बदलाव का सीधा मतलब यह है कि अब कफ सिरप को सामान्य दवाओं की छूट वाली श्रेणी से बाहर कर दिया गया है.
अब किसी भी छोटे गांव में कफ सिरप की बिक्री और वितरण केवल वही मेडिकल स्टोर या फार्मेसी कर सकेंगे, जिनके पास सरकार द्वारा जारी वैध ड्रग लाइसेंस होगा.
क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और कफ सिरप के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने का हवाला दिया है. सरकार का मानना है कि:
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नियामकीय निगरानी: सिरप आधारित दवाओं की बिक्री, सप्लाई चेन और वितरण पर सरकारी विभागों की सीधी और मजबूत निगरानी (Regulatory Oversight) जरूरी हो गई थी.
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सुरक्षा मानक: ग्रामीण इलाकों में बिना डॉक्टर के पर्चे या बिना विशेषज्ञता के कफ सिरप की धड़ल्ले से होने वाली बिक्री पर रोक लगाकर स्वास्थ्य मानकों को बेहतर बनाना है.
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
केंद्र सरकार ने इस अधिसूचना के साथ ही देश भर के सभी दवा निर्माताओं (Manufacturers), थोक वितरकों (Wholesalers) और खुदरा विक्रेताओं (Retailers) को सख्त चेतावनी जारी की है. मंत्रालय ने कहा है कि कफ सिरप के निर्माण से लेकर उसकी अंतिम बिक्री तक, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा. बिना लाइसेंस के कफ सिरप बेचना अब कानूनन अपराध माना जाएगा.
