नियामी, 19 जून। पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर की राजधानी नियामी से एक बेहद भीषण आतंकवादी हमले की खबर आई है। गुरुवार तड़के भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने वहां के मुख्य हवाई अड्डे, डियोरी हमानी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Diori Hamani International Airport) को निशाना बनाया। एयरपोर्ट परिसर में एक घंटे से भी अधिक समय तक लगातार धमाके और अंधाधुंध गोलीबारी होती रही। इस हमले में नाइजर के 11 सैनिकों सहित दो आम नागरिकों की मौत हो गई, जबकि सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में 22 आतंकवादियों को मार गिराया है।
मुख्य प्रवेश द्वार के पास हमला; भागते हुए हथियार छोड़ गए आतंकी
नाइजीरियाई समाचार पत्र ‘प्रीमियर टाइम्स’ और नाइजर गणराज्य की सैन्य सरकार की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार:
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परिसर की घेराबंदी: गोलीबारी की शुरुआत एयरपोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार के पास हुई। हमला होते ही मुस्तैद सुरक्षा बलों ने तुरंत पूरे हवाई अड्डा परिसर को चारों तरफ से घेर लिया।
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मुठभेड़ और तलाशी: सेना की मजबूत घेराबंदी के बाद आतंकवादियों में अफरा-तफरी मच गई और वे इधर-उधर भागने लगे। नाइजर की सेना ने भागते हुए दहशतगर्दों का पीछा किया। इस दौरान घबराए आतंकवादी अपने पीछे हथियारों का भारी जखीरा (असला-बारूद) मौके पर ही छोड़ गए।
फिलहाल किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है।
जनवरी में भी दहल चुका है यही एयर बेस
गौरतलब है कि इसी साल जनवरी महीने में भी इस एयरपोर्ट पर इसी तरह का एक बड़ा हमला हो चुका है।
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मोर्टार और ड्रोन से हमला: जनवरी में ‘इस्लामिक स्टेट इन द साहेल’ (IS-Sahel) से जुड़े चरमपंथियों ने मोर्टार और ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए नागरिक टर्मिनल और उससे सटे बेहद संवेदनशील सैन्य ठिकाने ‘एयर बेस 101’ को निशाना बनाया था।
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रणनीतिक महत्व: यह एयर बेस देश के सैन्य अभियानों का एक मुख्य केंद्र है। उस समय हुए हमले में नाइजर की सेना के साथ वहां तैनात ‘रूसी अफ्रीका कॉर्प्स’ के लड़ाकों ने भी मोर्चा संभाला था। हालांकि, उस दौरान रनवे, सैन्य वाहनों और वाणिज्यिक विमानों को भारी नुकसान पहुंचा था।
साहेल क्षेत्र में कई मोर्चों पर जारी है उग्रवाद से जंग
नाइजर पिछले एक दशक से अधिक समय से संगठित इस्लामी उग्रवाद और हिंसक चरमपंथ का सामना कर रहा है, जिसने पूरे साहेल (Sahel) क्षेत्र को अस्थिर कर रखा है। अपने पड़ोसी देशों माली और बुर्किना फासो की तरह नाइजर में भी इस समय सैन्य सरकार (जुंटा) का शासन है, जिसने देश को हिंसा से मुक्त कराने का वादा कर सत्ता संभाली थी।
वर्तमान में नाइजर की सेना को अलग-अलग भौगोलिक मोर्चों पर कई विद्रोही समूहों से लड़ना पड़ रहा है:
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पश्चिमी सीमा (माली और बुर्किना फासो से सटा इलाका): यहाँ सेना का मुकाबला मुख्य रूप से IS-साहेल और अल-कायदा से जुड़े JNIM (जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन) से है।
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दक्षिण-पूर्वी सीमा (लेक चाड क्षेत्र): यहाँ नाइजर की सेना बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) जैसे खूंखार आतंकी संगठनों के खिलाफ मोर्चे पर डटी हुई है।
