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Friday, August 7, 2026

वन महोत्सव में मुख्यमंत्री ने दिया हरित भविष्य का संदेश

रांची। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में कहा कि जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के बिना समृद्ध और संतुलित झारखंड का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौती है और विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलन ही सतत भविष्य की असली कुंजी है।

खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अपनी धर्मपत्नी एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ शामिल हुए। दोनों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से प्रत्येक व्यक्ति को कम-से-कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता, पशु-पक्षियों और वन्यजीवों पर गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। अनियमित वर्षा, अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और बिजली गिरने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिनसे जनजीवन और आजीविका प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य में वृक्षारोपण अभियानों के तहत स्थानीय, फलदार, छायादार, औषधीय तथा वन्यजीवों के लिए उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जाएगी। वृक्षारोपण योजनाओं में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, मिट्टी, जलवायु और जैव विविधता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दे रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न अभियानों के तहत लगाए गए पौधों की स्थिति का वह स्वयं समय-समय पर जायजा लेंगे और उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों तथा संस्थाओं को सम्मानित भी किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े तीन नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मुख्यमंत्री ने असम समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आई बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण देने के लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को जनभागीदारी से जोड़ना होगा।

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