नई दिल्ली । वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और सल्फर की बड़ी खेप लेकर आ रहे चार मालवाहक जहाज पिछले सप्ताह सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों के आगमन से देश के मौजूदा उर्वरक भंडार को और मजबूती मिलेगी।
कृष्णापटनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों पर पहुंचेगी खेप
भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन चारों जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान कर दिया गया है और ये अब भारत के विभिन्न निर्धारित बंदरगाहों—कृष्णापटनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा की ओर अग्रसर हैं। बंदरगाहों पर पहुंचते ही खाद की खेप को तेजी से उतारकर राज्यों और किसानों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
देश में खाद का रिकॉर्ड स्टॉक: पिछले साल से अधिक उपलब्धता
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 22 जून तक देश में कुल 196.08 लाख टन खाद का मजबूत भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 168.67 लाख टन के मुकाबले काफी अधिक है।
मौजूदा उर्वरक भंडार की स्थिति (लाख टन में):
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यूरिया: 81.44
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एनपीके (NPK): 55.91
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एसएसपी (SSP): 25.13
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डीएपी (DAP): 20.92
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एमओपी (MOP): 12.68
मांग और घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
कृषि सीजन के चलते इस बार खाद की मांग में भी बढ़ोतरी देखी गई है। 1 मार्च से 21 जून के बीच देश में कुल 153.4 लाख टन खाद की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (140.2 लाख टन) से 13.2 लाख टन अधिक है।
वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए सरकार ने स्वदेशी उत्पादन को अधिकतम स्तर पर पहुंचाया। इस दौरान घरेलू उर्वरक उत्पादन बढ़कर 133.12 लाख मीट्रिक टन के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गया। साथ ही, घरेलू आपूर्ति को सहारा देने के लिए इस अवधि में कुल 43.69 लाख मीट्रिक टन का लक्षित आयात भी किया गया।
इन वैश्विक साझेदारों से सुनिश्चित की गई आपूर्ति
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत ने विभिन्न देशों से उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बनाए रखी:
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यूरिया के लिए (11 देश): ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड।
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डीएपी/एनपीके के लिए (8 देश): लाल सागर समुद्री मार्ग के माध्यम से रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब।
