पश्चिम मेदिनीपुर। चंद्रकोणा क्षेत्र में आलू किसानों, व्यापारियों और शीतगृह संचालकों पर संकट गहराता जा रहा है। आलू का उचित मूल्य नहीं मिलने और शीतगृहों में बड़ी मात्रा में भंडारण होने से सभी वर्ग चिंतित हैं। अब उन्हें नई राज्य सरकार से राहत मिलने की उम्मीद है।
किसानों का कहना है कि मार्च में आलू की अच्छी पैदावार हुई थी, लेकिन अधिक उत्पादन के कारण उन्हें फसल का उचित दाम नहीं मिला। कई किसानों ने खेती के लिए ऊंचे ब्याज पर ऋण लिया था या आभूषण गिरवी रखे थे। आर्थिक संकट के चलते मार्च में चंद्रकोणा क्षेत्र के दो किसानों की मौत भी हुई थी, जिससे पूरे इलाके में चिंता का माहौल बन गया।
बेहतर कीमत की उम्मीद में किसानों ने अधिक किराया देकर आलू शीतगृहों में रखा, लेकिन अब वहां से आलू केवल साढ़े पांच से छह रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है। वहीं खुदरा बाजार में यही आलू 10 से 12 रुपये प्रति किलोग्राम तक बेचा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि इस अंतर का लाभ बिचौलियों को मिल रहा है, जबकि उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आलू व्यापारियों का कहना है कि वे शीतगृहों से सीधे खरीदारी नहीं कर सकते और उन्हें बिचौलियों के माध्यम से आलू खरीदना पड़ता है। इससे उनकी लागत बढ़ जाती है और व्यापार प्रभावित होता है।
शीतगृह संचालकों और व्यापारियों के अनुसार, पहले पश्चिम बंगाल का आलू बिहार, ओडिशा और झारखंड समेत कई राज्यों में भेजा जाता था। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में दूसरे राज्यों को आलू भेजने पर लगी रोक से बंगाल ने अपना बड़ा बाजार खो दिया। अब नई सरकार ने यह रोक हटाने और किसानों व व्यापारियों को राहत देने का भरोसा दिया है।
हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि दूसरे राज्यों में आलू भेजने के लिए परिवहन सहायता या अन्य सुविधाओं को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट सरकारी निर्देश जारी नहीं हुआ है। इससे शीतगृहों में रखा आलू समय पर बाहर नहीं निकल पा रहा है।
शीतगृह संचालकों के मुताबिक, चंद्रकोणा के शीतगृहों में रखा केवल 30 प्रतिशत आलू ही बिक पाया है, जबकि 70 प्रतिशत आलू अब भी भंडारित है। सरकारी नियमों के अनुसार दिसंबर तक शीतगृह खाली करना आवश्यक होता है, ताकि जनवरी और फरवरी में मरम्मत के बाद मार्च से नई फसल का भंडारण किया जा सके। ऐसे में किसानों, व्यापारियों और शीतगृह संचालकों की निगाहें अब नई सरकार के अगले फैसलों पर टिकी हैं।
