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Wednesday, May 20, 2026

पश्चिम बंगाल में 1 जून से लागू होगी ‘अन्नपूर्णा योजना’, महिलाओं को हर महीने मिलेंगे ₹3000

‘लक्खी भंडार’ की लाभार्थी महिलाओं को सीधे मिलेगा फायदा; 25 से 60 वर्ष की महिलाएं कर सकेंगी आवेदन

कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अन्नपूर्णा योजना’ आगामी 1 जून से पूरे राज्य में लागू होने जा रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। राज्य के वित्त विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी कर दिया है।

लक्खी भंडार की लाभार्थियों को सीधा ट्रांसफर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की इस योजना को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। वर्तमान में राज्य की ‘लक्खी भंडार’ योजना का लाभ ले रही महिलाओं को बिना किसी परेशानी के सीधे ‘अन्नपूर्णा योजना’ में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। वहीं, जो महिलाएं पहले से किसी योजना से नहीं जुड़ी हैं, वे 1 जून से शुरू होने वाले विशेष ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नया आवेदन कर सकेंगी। आवेदन के लिए उम्र सीमा 25 से 60 वर्ष तय की गई है।

कई स्तरों पर होगी आवेदनों की जांच
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवेदनों की कड़े स्तर पर स्क्रूटनी (जांच) की जाएगी। ग्रामीण इलाकों में बीडीओ (BDO), शहरी क्षेत्रों में एसडीओ (SDO) और कोलकाता में नगर निगम के अधिकारी फॉर्म की जांच करेंगे। इन अधिकारियों की हरी झंडी और नगर आयुक्त की अंतिम मंजूरी के बाद ही लाभार्थियों का डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा और सहायता राशि जारी होगी।

इन्हें नहीं मिलेगा योजना का लाभ (अपात्र श्रेणियां)
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि निम्नलिखित श्रेणियों से जुड़ी महिलाएं इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगी:
केंद्र या राज्य सरकार के स्थायी कर्मचारी और पेंशनभोगी।
सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और पंचायत कर्मी।
आयकर दाता (Income Tax Payers) परिवार।
इसके अलावा, 2026 के एसआईआर (SIR) ढांचे के तहत जिन्हें मृत, लापता या नागरिकता के सवालों के घेरे में चिह्नित किया गया है, उनके मामलों के निपटारे तक लाभ रोक दिया जाएगा।

राजनीतिक गलियारों में हलचल: राज्य में महिला केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं को लेकर जारी राजनीतिक सरगर्मियों के बीच, इस योजना को ममता सरकार का एक बड़ा और गेम-चेंजर दांव माना जा रहा है।

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