सीमा बाड़बंदी और बॉर्डर आउटपोस्ट के लिए हुआ भूमि अधिग्रहण; जमीन मालिकों को मिलेगा 4 गुना मुआवजा
कोलकाता । भारत–बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को लगभग 100 एकड़ भूमि हस्तांतरित (Transfer) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम से सीमा पर लंबे समय से लंबित बाड़बंदी (Fencing) और अन्य बुनियादी ढांचों के विकास कार्यों को बड़ी गति मिलने की उम्मीद है।
बॉर्डर आउटपोस्ट और ‘चिकन नेक’ पर विशेष ध्यान
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हस्तांतरित की जा रही जमीन में से 43 एकड़ से अधिक हिस्सा पांच सीमावर्ती जिलों में बाड़बंदी के लिए इस्तेमाल होगा। वहीं, लगभग 56 एकड़ सरकारी भूमि पर बीएसएफ की नई बॉर्डर आउटपोस्ट (सीमा चौकियां) बनाई जाएंगी, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 200 मीटर की दूरी पर होंगी।
सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी के “चिकन नेक” इलाके के पास भी लगभग 6 एकड़ जमीन बीएसएफ को देने पर विचार चल रहा है, जहाँ एक नया मुख्यालय बनाने की योजना है।
भूमि अधिग्रहण पूरा, बैठक की संभावना
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद (24 एकड़ से अधिक), मालदा (लगभग 10 एकड़), कूचबिहार, उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण दिनाजपुर (9.8 एकड़) जैसे सीमावर्ती जिलों में भूमि अधिग्रहण का काम या तो पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है। इस पहल से करीब 456 किलोमीटर क्षेत्र में अटका हुआ बाड़बंदी का काम पूरा हो सकेगा। इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी की मुख्यमंत्री के साथ कोलकाता में बैठक होने की भी संभावना है।
मुआवजे का बड़ा ऐलान: सरकार ने जमीन मालिकों के हितों का ध्यान रखते हुए स्पष्ट किया है कि जिन भी किसानों या भूमि मालिकों की जमीन इस परियोजना के लिए ली गई है, उन्हें सरकारी मानक से चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। यह भुगतान राज्य प्रशासन के माध्यम से सीधे किया जाएगा, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के साथ परामर्श प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

