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Wednesday, May 20, 2026

RTE के तहत रांची के नामी स्कूलों में पढ़ेंगे 641 गरीब बच्चे, ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया संपन्न

रांची । शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को बड़े निजी (प्राइवेट) स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाने की दिशा में रांची जिला प्रशासन ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्राइवेट स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर दाखिले के लिए ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इस पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से जिले के 89 निजी विद्यालयों में कुल 641 बच्चों का चयन किया गया है।

पारदर्शिता का रखा गया खास ख्याल
रांची के उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजंत्री के निर्देशानुसार इस पूरी प्रक्रिया को बेहद निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया गया। ऑनलाइन लॉटरी का आयोजन अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) की अध्यक्षता में किया गया। इस दौरान पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पांच निजी स्कूलों के प्रिंसिपल, पांच अभिभावक और मीडिया प्रतिनिधि भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

1499 आवेदनों में से हुआ चयन
नामांकन प्रक्रिया के मुख्य आंकड़े और नियम इस प्रकार हैं:
कानूनी प्रावधान: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी) के तहत सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की एंट्री लेवल क्लास (नर्सरी/कक्षा 1) में 25 फीसदी सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।

आवेदनों की स्क्रूटनी: जिला प्रशासन के अनुसार, इस साल आरटीई के तहत कुल 1,499 आवेदन मिले थे। जांच और सत्यापन के बाद 1,036 आवेदनों को लॉटरी के लिए योग्य पाया गया। जिले के 117 मान्यता प्राप्त स्कूलों की कुल 1,158 सीटों के लिए यह चयन प्रक्रिया चलाई गई।

कक्षा 8वीं तक निःशुल्क शिक्षा का अधिकार
लॉटरी के जरिए चुने गए ये 641 बच्चे अब बिना कोई फीस दिए रांची के चिन्हित प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन ले सकेंगे। इन्हें कक्षा आठवीं तक किताबें, ड्रेस और पढ़ाई सहित पूरी शिक्षा मुफ्त दी जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि इस पहल का असल मकसद समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों के बच्चों को भी बड़े स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर देना है।

इस महत्वपूर्ण मौके पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) और सहायक जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी (ADIO) समेत शिक्षा विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन के मुताबिक, इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक समानता को और मजबूती मिलेगी।

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