कोलकाता । निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने मंगलवार को कहा कि बांग्लादेश में सभी लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों को राजनीति करने का समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने शेख हसीना की पार्टी पर लगी पाबंदियां हटाकर उसे फिर से राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की।
उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी में समाज सुधारक बेगम रोकेया सखावत हुसैन की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचीं तसलीमा नसरीन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने धर्म आधारित राजनीति का विरोध करते हुए कहा कि यह महिलाओं के अधिकारों और समाज, दोनों के लिए नुकसानदेह है।
कट्टरवाद का किया विरोध
तसलीमा ने कहा कि बेगम रोकेया को अपने जीवनकाल में महिला शिक्षा, महिला अधिकारों और धार्मिक कट्टरवाद के खिलाफ आवाज उठाने के कारण मुस्लिम कट्टरपंथियों का विरोध झेलना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि इसी विरोध के चलते बेगम रोकेया को रात के अंधेरे में पानीहाटी में दफनाया गया था।
बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यदि जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उनके अनुसार, यह संगठन शरीयत कानून और महिला विरोधी नीतियों का समर्थन करता है, जो महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए खतरा बन सकता है।
यूसीसी का भी किया समर्थन
तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनकी भी बांग्लादेश लौटने की इच्छा है, लेकिन अब तक उन्हें अपने देश वापस जाने की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन करते हुए कहा कि इससे सभी धर्मों की महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे और कानून समानता के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।
