उज्जैन । सावन माह में धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद रिमझिम बारिश के बीच समर्पण कांवड़ यात्रा निकली, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरी अवंतिका नगरी ‘बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठी।
समर्पण कांवड़ यात्रा के संयोजक एवं समाजसेवी नारायण यादव ने बताया कि यात्रा का शुभारंभ सुबह 11 बजे इंदौर रोड स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर, त्रिवेणी घाट से हुआ। कांवड़ पूजन के बाद श्रद्धालु मां शिप्रा का पवित्र जल लेकर भगवान महाकालेश्वर के जलाभिषेक के लिए रवाना हुए। बारिश के बावजूद महिला, पुरुष और बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
त्रिवेणी घाट से महाकाल मंदिर तक निकली यात्रा
यात्रा श्री नवग्रह शनि मंदिर, नानाखेड़ा चौराहा, मुनीम नगर दो तालाब, संतराम सिंधी कॉलोनी चौराहा, शास्त्री नगर, नीलगंगा चौराहा और हरि फाटक ओवरब्रिज होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों का स्वागत किया गया। यात्रा के शुभारंभ से पहले संतों और महंतों की उपस्थिति में विधि-विधान से पूजन-अर्चन भी किया गया।
भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती संपन्न हुई। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अलसुबह वीरभद्र जी से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए और भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से जलाभिषेक किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई और ढोल-नगाड़ों, शंखनाद तथा झांझ-मंजीरों की गूंज के बीच भस्म आरती संपन्न हुई।
इसके बाद बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत चंद्र, त्रिशूल, त्रिपुंड, शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया। फल और मिष्ठान का भोग अर्पित करने के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
