रायपुर । छत्तीसगढ़ में बिजली बिल का भुगतान नहीं करने वाले सरकारी विभागों के खिलाफ बिजली कंपनी ने सख्त कार्रवाई की है। राज्य में 10 हजार से अधिक सरकारी बिजली कनेक्शन स्थायी रूप से काट दिए गए हैं। इन कनेक्शनों पर करीब 51 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया था।
सरकारी विभागों पर 3,432 करोड़ रुपये से अधिक बकाया
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने वित्तीय दबाव और बढ़ते घाटे को देखते हुए यह कार्रवाई की है। कंपनी के अनुसार प्रदेश के 40 सरकारी विभागों पर कुल 3,432 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है।
अधिकारियों ने बताया कि भुगतान के लिए संबंधित विभागों को कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन समय पर राशि जमा नहीं होने के बाद कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गई। जिन कनेक्शनों को भविष्य में दोबारा चालू किया जाएगा, उनके लिए पहले पूरा बकाया भुगतान करना अनिवार्य होगा।
1 अगस्त से सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड बिजली व्यवस्था
बिजली कंपनी ने बताया कि जिन परिसरों में अभी बिजली आपूर्ति जारी है, वहां बकाया राशि की वसूली के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, 1 अगस्त 2026 से सभी सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
यह कार्रवाई अंबिकापुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायपुर, जगदलपुर, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर और राजनांदगांव सहित कई बिजली सर्कलों में की गई है।
दो विभागों पर 85 प्रतिशत से अधिक बकाया
हाल में विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार ने भी सरकारी विभागों पर हजारों करोड़ रुपये के बिजली बिल बकाये की जानकारी दी थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 3,117.49 करोड़ रुपये के बकाये में करीब 85 प्रतिशत हिस्सा दो प्रमुख विभागों का है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग पर सबसे अधिक 1,525.18 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें नगर निकायों के जल आपूर्ति संयंत्र, स्ट्रीट लाइट और कार्यालयों के बिजली बिल शामिल हैं। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 1,057.56 करोड़ रुपये की देनदारी है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर करीब 111 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि गृह, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा और सिंचाई विभागों सहित अन्य विभागों पर भी बड़ी राशि लंबित है।
जरूरी सेवाओं के कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे
बिजली कंपनी ने स्पष्ट किया है कि पेयजल आपूर्ति, सरकारी अस्पताल, स्ट्रीट लाइट और स्कूल जैसी आवश्यक सेवाओं के बिजली कनेक्शन सीधे नहीं काटे जाएंगे। इन सेवाओं को जारी रखते हुए बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
