नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले लोकसभा में दलगत समीकरण में बड़ा बदलाव हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने को मंजूरी दे दी है। इसके बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव गुट के पास अब केवल तीन सांसद रह गए हैं।
लोकसभा सचिवालय की ओर से शनिवार को जारी परिपत्र के अनुसार, छह सांसदों को सदन में शिंदे गुट के सदस्य के रूप में मान्यता दे दी गई है। इसके साथ ही दोनों शिवसेना गुटों की संसदीय स्थिति में औपचारिक बदलाव दर्ज हो गया है।
तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों को अलग समूह की मान्यता
जारी परिपत्र में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के भीतर अलग गुट बनाने वाले 28 सांसदों में से 20 सांसदों को लोकसभा में पृथक समूह के रूप में बैठने की अनुमति भी दी गई है। इससे सदन की बैठक व्यवस्था और संसदीय दलों की संरचना में बदलाव होगा।
मानसून सत्र से पहले बदले राजनीतिक समीकरण
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। ऐसे समय में लोकसभा में बदला संख्या बल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश कर सकती है, जिनमें पिछले सत्र में लंबित रहे कुछ प्रस्ताव भी शामिल हैं।
पिछले बजट सत्र में लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक सहित कुछ अहम विधेयक आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो सके थे। अब संभावना जताई जा रही है कि सरकार इन्हें संशोधित स्वरूप में फिर से सदन में पेश कर सकती है।
हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की स्थिति उच्च सदन में भी मजबूत हुई है और गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गया है। वहीं, सहयोगी दलों के समर्थन से लोकसभा में भी सरकार का संख्या बल पहले की तुलना में अधिक मजबूत माना जा रहा है।
