रांची। फेडरेशन ऑफ बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन की 145वीं कार्यकारिणी समिति की बैठक शनिवार को रांची के हरदाग स्थित मोमेंट्स रिज़ॉर्ट में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में देशभर की 17 राज्य इकाइयों के महासचिवों और फेडरेशन के पदाधिकारियों ने भाग लेकर बैंक अधिकारियों के हितों और संगठन को मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में फेडरेशन के महासचिव कॉमरेड नीलेश पवार, अध्यक्ष कॉमरेड नागेश्वर अण्णा, कार्यकारी अध्यक्ष कॉमरेड श्वेतांक त्रिवेदी, चेयरमैन कॉमरेड संजय कुमार दास सहित सभी राज्य इकाइयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं, फेडरेशन के सलाहकार एवं झारखंड राज्य इकाई के महासचिव कॉमरेड सुनील लकड़ा स्वास्थ्य कारणों से शामिल नहीं हो सके। उनकी अनुपस्थिति में झारखंड इकाई के अध्यक्ष कॉमरेड प्रकाश उरांव, कोषाध्यक्ष कॉमरेड मनीष कुमार और सहायक महासचिव कॉमरेड शैलेंद्र सिंह ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने लगभग 14 वर्ष बाद झारखंड में कार्यकारिणी समिति की बैठक आयोजित होने पर फेडरेशन का आभार जताया।
अधिकारियों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता : नीलेश पवार
फेडरेशन के महासचिव कॉमरेड नीलेश पवार ने आयोजन के लिए झारखंड राज्य इकाई की सराहना करते हुए कहा कि बैंक के कारोबार में वृद्धि सभी अधिकारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इसी प्रतिबद्धता के कारण पिछले तीन तिमाहियों में बैंक का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन अधिकारियों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करता रहा है और भविष्य में भी करता रहेगा। अधिकारियों से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण मुद्दे को बैंक प्रबंधन के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया जाता है और समाधान तक लगातार प्रयास किए जाते हैं।
निजीकरण के विरोध और पाँच दिवसीय बैंकिंग पर जोर
फेडरेशन के अध्यक्ष कॉमरेड नागेश्वर अण्णा ने भगवान बिरसा मुंडा और झारखंड की वीर भूमि को नमन करते हुए कहा कि फेडरेशन केवल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों ही नहीं, बल्कि पूरे बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारियों और अधिकारियों के व्यापक हितों के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने बैंकों के निजीकरण के विरोध, पाँच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, पारिवारिक पेंशन में सुधार तथा अन्य प्रमुख मुद्दों पर फेडरेशन की सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि फेडरेशन 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते की तैयारियों में भी सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। उनका कहना था कि बैंकों के निजीकरण का सबसे अधिक प्रभाव आम जनता पर पड़ेगा, इसलिए इसके खिलाफ जन-जागरूकता अभियान को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना जरूरी है।
बैठक के दौरान कार्यसूची के विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनने के बाद धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन हुआ।
