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Saturday, July 18, 2026

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में समुद्र के नीचे दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू

नई दिल्ली। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत ठाणे क्रीक के नीचे देश की पहली समुद्र के भीतर बनने वाली रेल सुरंग के निर्माण में नई प्रगति हुई है। शनिवार को दूसरी टनल बोरिंग मशीन ने सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर सुरंग की खुदाई शुरू कर दी। 10 किलोमीटर लंबे इस खंड में सात किलोमीटर सुरंग समुद्र के नीचे बनाई जाएगी, जो भारत के किसी भी रेल गलियारे की पहली समुद्र के भीतर बनने वाली सुरंग होगी।

रेल मंत्रालय के अनुसार, परियोजना के 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत सुरंग खंड में से 16 किलोमीटर का निर्माण टनल बोरिंग मशीनों की सहायता से किया जा रहा है। पहली मशीन ने पांच जुलाई को विक्रोली से बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स की ओर छह किलोमीटर लंबे हिस्से में खुदाई शुरू की थी। वहीं, शेष पांच किलोमीटर का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग पद्धति से पहले ही पूरा किया जा चुका है।

अत्याधुनिक तकनीक से होगी सुरंग की खुदाई

रेल मंत्रालय ने बताया कि यह टनल बोरिंग मशीन भारत में रेल सुरंग निर्माण के लिए अब तक की सबसे बड़ी मशीनों में शामिल है। इसका कटरहेड 13.6 मीटर व्यास का, कुल वजन 3,200 टन और लंबाई 96 मीटर है। यह अर्ध-स्वचालित स्लरी आधारित मिश्रित शील्ड मशीन है, जो खुदाई के दौरान सुरंग के अग्रभाग को स्थिर बनाए रखती है। मुंबई की भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जमीन धंसने की आशंका कम होगी और सतह पर व्यवधान भी न्यूनतम रहेगा।

मशीन में उन्नत अर्ध-सतत प्रगति प्रणाली लगी है, जिससे सुरंग की रिंग लगाने और खुदाई का कार्य एक साथ किया जा सकता है। इसके अलावा बहु-गैस निगरानी प्रणाली, स्वचालित अग्निशमन व्यवस्था, जल सुरक्षा प्रणाली और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं भी इसमें उपलब्ध हैं।

39 मीटर गहरे शाफ्ट से शुरू हुआ अभियान

सावली में मशीन को उतारने के लिए 39 मीटर गहरा शाफ्ट बनाया गया है। सीमित स्थान होने के कारण मशीन को अलग-अलग हिस्सों में नीचे उतारकर जोड़ा गया। परियोजना स्थल पर जल शोधन संयंत्र, स्लरी शोधन संयंत्र, बेंटोनाइट भंडारण टैंक, समर्पित विद्युत उपकेंद्र, बैकअप जनरेटर, तैयार मिश्रित कंक्रीट संयंत्र और अन्य आवश्यक सुविधाएं स्थापित की गई हैं।

परियोजना में सुरंग निर्माण और आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा के लिए वास्तविक समय निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। सुरंग को पूरी तरह जलरोधी बनाया जा रहा है। पानी के प्रवेश को रोकने के लिए सुरंग के अस्तर में विशेष दोहरी परत वाली सील का उपयोग किया जा रहा है।

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