नई दिल्ली। भारत सरकार ने ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत रियायती सीमा शुल्क पर वाहनों के आयात के लिए कोटा आधारित व्यवस्था की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नई व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू होगी। पहले वर्ष में कुल 20 हजार यात्री कारों के आयात की अनुमति दी जाएगी।
डीजीएफटी ने जारी की अधिसूचना
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने सार्वजनिक सूचना जारी कर बताया कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत कोटा आधारित शुल्क दर (टीआरक्यू) लागू की जाएगी। रियायती शुल्क का लाभ लेने के लिए आयातकों को सीमा शुल्क निकासी के समय ब्रिटेन के अधिकृत प्राधिकरण द्वारा जारी मूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।
डीजीएफटी के अनुसार केवल ब्रिटेन में निर्मित वाहनों के मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) या उनके अधिकृत डीलर एवं चैनल भागीदार ही टीआरक्यू के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रत्येक आवेदक को ब्रिटेन स्थित निर्माता की ओर से जारी पूर्व-क्रय समझौता भी प्रस्तुत करना होगा।
पहले वर्ष में 20 हजार कारों के आयात की अनुमति
समझौते के पहले वर्ष में तीन श्रेणियों में कुल 20 हजार यात्री कारों के आयात की अनुमति होगी।
- 3,000 सीसी से अधिक पेट्रोल और 2,500 सीसी से अधिक डीजल इंजन वाली कारों के लिए 10 हजार इकाइयों का कोटा होगा। इन पर सीमा शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत किया जाएगा।
- 1,500 से 3,000 सीसी पेट्रोल और 2,500 सीसी तक डीजल इंजन वाली कारों के लिए 5 हजार इकाइयों का कोटा रहेगा। इन पर शुल्क 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत होगा।
- 1,500 सीसी तक की जन बाजार श्रेणी की कारों के लिए भी 5 हजार इकाइयों के आयात की अनुमति होगी और इन पर सीमा शुल्क 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा।
भारत पहले 15 वर्षों में ब्रिटेन से पारंपरिक इंजन वाले 3.78 लाख यात्री वाहनों के आयात की अनुमति रियायती शुल्क पर देगा। पांचवें वर्ष तक वार्षिक कोटा बढ़कर 37 हजार वाहन हो जाएगा और सीमा शुल्क क्रमिक रूप से घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों को शुरुआती पांच वर्षों तक रियायत नहीं
सरकार ने 40 हजार ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) से कम कीमत वाले वाहनों के लिए भारतीय बाजार नहीं खोला है। इससे घरेलू वाहन उद्योग, विशेषकर जन बाजार और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को संरक्षण मिलेगा।
इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन चालित यात्री कारों पर पहले पांच वर्षों तक कोई शुल्क रियायत नहीं दी जाएगी। हालांकि, छठे वर्ष से 40 हजार से 80 हजार ब्रिटिश पाउंड कीमत वाले ऐसे वाहनों पर 50 प्रतिशत सीमा शुल्क और 400 वाहनों का कोटा लागू होगा। वहीं, 80 हजार ब्रिटिश पाउंड से अधिक कीमत वाले वाहनों पर 40 प्रतिशत शुल्क के साथ 4 हजार इकाइयों के आयात की अनुमति होगी।
