पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की सराहना, प्रतिबंधों में ढील और तेल निर्यात पर मिलीं रियायतें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रगति होने का बड़ा दावा किया है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी एक आधिकारिक बयान में, अराक्ची ने पाकिस्तान और कतर द्वारा की जा रही “अथक मध्यस्थता” की सराहना की। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी प्रेसटीवी के अनुसार, विदेश मंत्री ने बताया कि इन शांति प्रयासों के तहत तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़ी कुछ अहम रियायतें दी गई हैं, ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील मिली है और साथ ही क्षेत्र में पुनर्निर्माण व विकास योजनाओं की रूपरेखा पर काम शुरू हो चुका है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन तमाम प्रयासों की वास्तविक सफलता केवल और केवल लेबनान में युद्धविराम (सीजफायर) के पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन पर ही टिकी हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी वार्ता संपन्न, वित्तीय संसाधनों की रिहाई पर बनी सहमति
यह महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रगति ऐसे समय में सामने आई है, जब स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय तकनीकी वार्ता का पहला दौर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने जानकारी दी कि इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य पूर्व में हुए समझौतों को धरातल पर उतारना था। तकनीकी स्तर की इस बातचीत में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सकारात्मक प्रगति हुई है:
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तेल बिक्री: ईरान के तेल निर्यात से जुड़े प्राधिकरणों और व्यापारिक रियायतों पर चर्चा।
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वित्तीय रिहाई: विदेशों में फ्रीज (जब्त) किए गए ईरानी वित्तीय संसाधनों को मुक्त करना।
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समुद्री सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित और बाधारहित आवाजाही सुनिश्चित करना।
कतर और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस पूरी वार्ता को सकारात्मक और रचनात्मक बताया है। भविष्य की चर्चाओं के लिए एक संस्थागत तंत्र और राजनीतिक निगरानी हेतु एक उच्चस्तरीय समिति बनाने पर भी सहमति बनी है।
ट्रंप की बयानबाजी के बाद बहुपक्षीय बैठकें रुकीं, दबाव की नीति का ईरान देगा कड़ा जवाब
क्रेमलिन और व्हाइट हाउस के बीच के इस कूटनीतिक गतिरोध के बीच कुछ अड़चनें भी आई हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया सख्त टिप्पणियों और धमकी भरे बयानों के बाद बहुपक्षीय (क्वाड्रिलेटरल) बैठकों को फिलहाल रोक दिया गया है, हालांकि दोनों पक्ष तकनीकी स्तर पर संवाद जारी रखने पर सहमत हैं। उधर, ट्रंप की बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ ने दोटूक कहा है कि किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव और धमकियों से ईरान अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं करने वाला। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी सशस्त्र बल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए और किसी भी सैन्य चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर इजराइली सैन्य कार्रवाई पूरी तरह थमे बिना, वे किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
