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Monday, June 22, 2026

इज़राइल को आईआरजीसी कुद्स फोर्स प्रमुख की चेतावनी: ‘दक्षिणी लेबनान छोड़ो या अपमानजनक तरीके से निकाले जाओगे’

स्वेच्छा से पीछे हटने या बलपूर्वक बाहर किए जाने के दो विकल्प दिए, वर्ष 2000 की याद दिलाई

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कुद्स फोर्स के प्रमुख कमांडर इस्माइल कानी ने दक्षिणी लेबनान में तैनात इज़राइली सेना को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। कानी ने कहा है कि इज़राइली सेना के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं—या तो वह स्वेच्छा से अपने कदम पीछे खींच ले, अन्यथा उसे बलपूर्वक और अपमानजनक तरीके से वहां से बाहर खदेड़ दिया जाएगा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी प्रेसटीवी के अनुसार, रविवार को सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश में कमांडर कानी ने सीधे हिब्रू भाषा में इज़राइली सैनिकों को संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इज़राइल समय रहते पीछे नहीं हटा, तो लेबनान में वर्ष 2000 जैसी ऐतिहासिक स्थिति दोबारा पैदा हो जाएगी, जब एक लंबे सैन्य कब्जे के बाद इज़राइल को भारी अपमान के साथ पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा था।

इज़राइली सेना को भारी नुकसान होने का दावा, युद्धविराम उल्लंघन के गंभीर आरोप

कुद्स फोर्स के कमांडर ने हालिया संघर्षों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिछले कुछ दिनों के भीतर ही इज़राइली सेना को लेबनान के मोर्चे पर भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि बहुत ही कम समय के भीतर बड़ी संख्या में इज़राइली सैनिक हताहत हुए हैं। यह तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब लेबनान-इज़राइल सीमा पर सैन्य गतिरोध और तनाव चरम पर है। ईरानी प्रशासन ने इज़राइल पर सीधे तौर पर युद्धविराम समझौतों का बार-बार उल्लंघन करने और लेबनान की संप्रभुता पर हमले जारी रखने का गंभीर आरोप लगाया है।

हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियां तेज, इज़राइल का सुरक्षा नीति बदलने से साफ इनकार

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर अपनी कार्रवाइयां तेज करने का दावा किया है। संगठन का कहना है कि उसने हाल के दिनों में कई इज़राइली सैनिकों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए कूटनीतिक समझौते के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि लेबनान सीमा पर संघर्ष थमेगा, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। दूसरी ओर, इज़राइली नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपनी वर्तमान सुरक्षा नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई उनके देश के सुरक्षा हितों के लिए अपरिहार्य है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्षों की इस आक्रामक बयानबाजी से क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा और गहरा गया है।

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