सिलीगुड़ी, 19 जून। सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता गौतम देव ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को अपना इस्तीफा सौंपने से पहले ही इस फैसले की जानकारी पार्टी नेतृत्व को दे दी थी। माना जा रहा है कि पार्टी में संगठनात्मक बदलावों और हालिया चुनावी नतीजों के दबाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है।
संगठन में मिली नई जिम्मेदारी बनी मुख्य वजह
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जिला चेयरमैन नियुक्त: हाल ही में तृणमूल कांग्रेस ने गौतम देव को दार्जिलिंग जिला (समतल) कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि वह प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर संगठन को मजबूत करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।
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प्रशासनिक चुनौतियां: सूत्रों के अनुसार, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वह प्रशासनिक कामकाज सुचारू रूप से नहीं कर पा रहे थे, जिससे वह असहज महसूस कर रहे थे। गुरुवार को हुई मेयर परिषद की बैठक में भी उन्होंने पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी।
उतार-चढ़ाव भरा रहा राजनीतिक सफर
गौतम देव उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं:
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मंत्रिमंडल में भूमिका: साल 2011 में जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ, तब ममता बनर्जी सरकार में उन्हें उत्तर बंगाल विकास विभाग का मंत्री बनाया गया। इसके बाद 2016 में दोबारा जीतने पर उन्हें पर्यटन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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चुनावी झटके और मेयर का सफर: 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2022 के सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में टीएमसी की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने उन्हें मेयर की कुर्सी सौंपी।
2026 के चुनावी नतीजों के बाद बढ़ीं अटकलें
गौतम देव के इस्तीफे की पृष्ठभूमि को हालिया विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी सीट से उन्हें एक बार फिर शिकस्त झेलनी पड़ी। इतना ही नहीं, शहर के लगभग सभी वार्डों में तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जिसे लेकर पार्टी के भीतर अंदरूनी नाराजगी और कलह खुलकर सामने आ गई थी। इसी के बाद से उनके इस्तीफे को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जिस पर आज विराम लग गया।
