रांची । मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने मोरहाबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय ‘झारखण्ड कृषि उत्पाद एवं व्यापार मेला 2026’ का मुख्य अतिथि के रूप में भव्य उद्घाटन किया। 16 से 18 जून तक चलने वाले इस मेले में देशभर के कृषि वैज्ञानिक और राज्यभर के प्रगतिशील किसान जुट रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिरसा कृषि रथ-2026 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण भी किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे को बुलंद करते हुए कहा कि खेती और किसान का इतिहास मानव सभ्यता की एक अनवरत यात्रा है। राज्य की लगभग 80 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, इसलिए किसानों का विकास ही राज्य का वास्तविक विकास है।
जल संकट और अंधाधुंध शहरीकरण पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और बढ़ते भू-जल दोहन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पीने और खेती के पानी का घोर संकट होने जा रहा है। धरती से हम जितना पानी ले रहे हैं, उसे रिचार्ज पिट और सोक पिट के जरिए वापस लौटाना भी होगा। उन्होंने किसानों से खेतों और बंजर भूमि पर जल संचय करने का आग्रह किया ताकि कम पानी में अधिक उपज ली जा सके।
शहरीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि सड़कों और उद्योगों के नाम पर 50-100 साल पुराने जंगलों को उजाड़कर शहरों को कंक्रीट के बेजान जंगल में बदला जा रहा है, जबकि वृक्षारोपण की रफ्तार बेहद धीमी है। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना अब अनिवार्य हो चुका है।
बिरसा हरित ग्राम योजना की वैश्विक गूंज और जैविक खेती पर जोर
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि पिछले कार्यकाल में शुरू की गई बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत अब तक लगभग 1.50 लाख एकड़ बंजर जमीन पर फलदार पेड़ लगाए जा चुके हैं। इसका परिणाम है कि सिमडेगा की जेएसएलपीएस (JSLPS) से जुड़ी दीदियों द्वारा उपजाया गया आम आज सीधे लंदन (यूके) निर्यात हो रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने कृषकों से रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम करने और जैविक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने सचेत किया कि रासायनिक खाद से उपजा अनाज जहरीला होता है, जो घूमकर हमारे ही परिवार तक पहुंचता है। सरकार जैविक खाद के उपयोग के लिए एक सुलभ रास्ता तैयार कर रही है।
प्रगतिशील किसानों की मैपिंग और विशेष डिजिटल पोर्टल का आदेश
कृषि विभाग को कड़े निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी आधुनिक और बेहतर खेती करने वाले उत्कृष्ट किसानों की मैपिंग की जाए। इन किसानों को मुख्यमंत्री की तरफ से सम्मानित किया जाएगा और तकनीकी उपकरणों के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
किसानों के सवालों, जिज्ञासाओं और सुझावों के तुरंत समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने विभाग को अविलंब एक ‘विशेष किसान डिजिटल पोर्टल’ तैयार करने का आदेश दिया है। इस पोर्टल पर किसान अपनी समस्याएं रख सकेंगे, जहां सरकार और कृषि वैज्ञानिक उन्हें तुरंत तकनीकी समाधान और परामर्श उपलब्ध कराएंगे।
साझा जिम्मेदारी से बदलेगी राज्य की तस्वीर
मेले में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों के कुल 200 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां कृषि क्षेत्र के नए नवाचारों को प्रदर्शित किया जा रहा है। आयोजित होने वाले सेमिनार के जरिए किसान नई तकनीकों से रूबरू हो सकेंगे।
संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आधी जिम्मेदारी सरकार उठाएगी और आधी किसानों को निभानी होगी। जब सरकार और कृषक साझा सहयोग के साथ आगे बढ़ेंगे, तो झारखंड की तस्वीर बदलना निश्चित है। इस गरिमामयी अवसर पर कृषि मंत्री, क्षेत्रीय विधायक, विभिन्न विभागों के सचिव और भारी संख्या में किसान उपस्थित थे।
