पटना । बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव तथा एक सीट पर उपचुनाव के लिए सोमवार को नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो गई। नामांकन के अंतिम दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने अपनी पूरी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सभी नौ उम्मीदवारों का नामांकन दाखिल कराया। वहीं महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार सुनील कुमार सिंह ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
नामांकन के दौरान राजधानी पटना में राजनीतिक गतिविधियां पूरे दिन तेज रहीं। राजग उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रम में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान,जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी सहित कई मंत्री, विधायक और गठबंधन दलों के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने विधान परिषद चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों तथा एक विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। पार्टी की ओर से मंत्री निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन किया। वहीं उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद ने अपना पर्चा दाखिल किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधान परिषद चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। पार्टी की ओर से संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर, शीला पंडित तथा भोजपुरी फिल्म अभिनेता से राजनीति में आए पवन सिंह ने नामांकन दाखिल किया।
राजग की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से अशरफ अंसारी ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही राजग ने सभी नौ सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का नामांकन पूरा कर लिया।
दूसरी ओर महागठबंधन की तरफ से राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार सुनील कुमार सिंह ने अपना नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन के साथ ही चुनावी मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट हो गई है।
विधान परिषद की इन सीटों के चुनाव को बिहार की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उम्मीदवारों की जांच, नाम वापसी और मतदान की तैयारियों पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। विधानसभा में संख्याबल के आधार पर राजग को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, लेकिन विपक्ष भी इस चुनाव को राजनीतिक संदेश देने के अवसर के रूप में देख रहा है।-
