रांची। फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एफजेसीसीआई) की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य में लागू रॉयल्टी चालान व्यवस्था से उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों और इसके कारण विकास कार्यों पर पड़ रहे प्रभावों पर चर्चा की गई। चैंबर ने राज्य सरकार से व्यवस्था स्पष्ट होने तक सरकारी संवेदकों के विपत्र भुगतान के लिए रॉयल्टी चालान की अनिवार्यता स्थगित करने की मांग की है।
भुगतान में देरी से विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका
बैठक में कहा गया कि किसी भी नई व्यवस्था की सफलता उसके स्पष्ट और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। वर्तमान में रॉयल्टी चालान व्यवस्था को लेकर अस्पष्टता के कारण सरकारी विभागों, संवेदकों, आपूर्तिकर्ताओं और निर्माण एजेंसियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
चैंबर ने चिंता जताई कि सरकारी संवेदकों के रनिंग अकाउंट बिलों के भुगतान के लिए रॉयल्टी चालान अनिवार्य किए जाने से सड़क, पुल, भवन, पेयजल, सिंचाई, नाली और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के भुगतान लंबित हो सकते हैं। इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होने के साथ संवेदकों, श्रमिकों और निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।
स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
बैठक में एफजेसीसीआई ने सुझाव दिया कि लघु खनिजों के लिए रॉयल्टी चालान जारी करने की प्रक्रिया, सक्षम अधिकारी और जिम्मेदारी को स्पष्ट करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही सभी संबंधित विभागों में एक समान कार्यप्रणाली लागू करने की मांग की गई।
चैंबर ने यह भी आग्रह किया कि संबंधित विभागों, संवेदकों और अन्य हितधारकों के साथ जल्द उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
एफजेसीसीआई ने इन मांगों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा है। चैंबर ने राज्यहित, विकास कार्यों की निरंतरता और उद्योग-व्यापार की सुगमता को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है।
बैठक में एफजेसीसीआई अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, उपाध्यक्ष राम बांगड़, महासचिव रोहित अग्रवाल, संयुक्त सचिव नवजोत अलंग, संयुक्त सचिव रोहित पोद्दार, कार्यकारिणी सदस्य शैलेश अग्रवाल और सदस्य शैलेन्द्र सुमन उपस्थित रहे।
