पूर्णिया । कोसी-सीमांचल क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली बहुप्रतीक्षित बिहारीगंज-बीरपुर नई रेल लाइन परियोजना को लेकर केंद्र और रेल मंत्रालय के स्तर पर सकारात्मक पहल शुरू हो गई है। पूर्णिया के नवनिर्वाचित सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इस प्रगति पर खुशी जाहिर करते हुए इसे पूरे इलाके के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया है। सांसद ने कहा कि इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना की मांग उन्होंने वर्ष 1991 में पहली बार संसद और सड़क पर उठाई थी और अब करीब 35 वर्षों के लंबे इंतजार और कड़े संघर्ष के बाद कोसी-सीमांचल की जनता का यह बड़ा सपना साकार होने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
92 किलोमीटर लंबी होगी नई रेल लाइन, इन प्रमुख कस्बों से गुजरेगी ट्रेन
सांसद पप्पू यादव ने परियोजना की तकनीकी और भौगोलिक रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बिहार के लिए प्रस्तावित नई रेल लाइन परियोजनाओं के बीच इसे विशेष प्राथमिकता मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। यह नई रेल लाइन लगभग 92 किलोमीटर लंबी होगी, जो बिहारीगंज से शुरू होकर वाया बनमनखी, मुरलीगंज, त्रिवेणीगंज, जदिया, छातापुर और प्रतापगंज होते हुए भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भीमनगर और बीरपुर तक जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे रूट का अंतिम सर्वेक्षण (सर्वे) कार्य बहुत पहले ही पूरा कर लिया गया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण वर्षों तक यह फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी रही, जिसे उन्होंने दोबारा गति प्रदान करवाई है।
रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के समक्ष लगातार उठाई क्षेत्र की आवाज
पप्पू यादव ने बताया कि उन्होंने हाल ही में रेल मंत्री से विशेष मुलाकात कर और आधिकारिक पत्र सौंपकर पूर्णिया, बनमनखी, बिहारीगंज सहित संपूर्ण सीमावर्ती जिलों की रेल आवश्यकताओं और उपेक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को भी इस बात से अवगत कराया कि इस परियोजना का सामरिक और आर्थिक महत्व कितना अधिक है। सांसद के अनुसार, इस ट्रैक के निर्माण से न केवल सुपौल, सहरसा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जैसे आधा दर्जन जिलों की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि इससे नेपाल सीमा से सटे होने के कारण देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाई इलाकों के परिवहन तंत्र को भी एक नया और मजबूत आधार मिलेगा।
व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में खुलेंगे प्रगति के नए द्वार
सांसद ने इस रेल लाइन को केवल आवागमन का साधन मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह वास्तव में कोसी-सीमांचल की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक प्रगति की नई रीढ़ साबित होगी। वर्तमान में इस इलाके के लोगों को बेहतर उच्च शिक्षा, उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुँचने के लिए लंबी और असुविधाजनक दूरियाँ तय करनी पड़ती हैं। इस नई रेल कनेक्टिविटी के बहाल होते ही पूरे क्षेत्र में कृषि उत्पादों के परिवहन, स्थानीय व्यापार, रोजगार के नए अवसरों और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे दशकों से पिछड़े इस सीमावर्ती अंचल के आम नागरिकों के जीवन स्तर में व्यापक और गुणात्मक सुधार आएगा।
