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Wednesday, May 20, 2026

पश्चिम बंगाल में VIP सुरक्षा में बड़ी कटौती: 1100 नेताओं और रसूखदारों से वापस ली जा रही सुरक्षा

समीक्षा के बाद राज्य सरकार का बड़ा फैसला; पूर्व मंत्रियों और रसूखदारों की सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव

कोलकाता | पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य प्रशासन के निर्देश पर एक बड़ा कदम उठाया गया है। लगभग 1,100 नेताओं, पूर्व मंत्रियों और प्रभावशाली व्यक्तियों को दी गई सुरक्षा की गहन समीक्षा के बाद अब इसे चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जा रहा है। इनमें से कई लोगों को ‘एक्स’, ‘वाई’, ‘वाई प्लस’ और ‘जेड’ श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा मिली हुई थी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुल 175 नेताओं को श्रेणीबद्ध (Categorized) सुरक्षा प्राप्त थी, जबकि लगभग 900 लोगों को गैर-श्रेणीबद्ध सुरक्षा दी जा रही थी। सुरक्षा खोने या कटौती का सामना करने वालों में दक्षिण 24 परगना के तृणमूल नेता शौकत मोल्ला (‘जेड’ श्रेणी), फलता के जहांगीर खान (‘वाई प्लस’) और डायमंड हार्बर के युवा तृणमूल अध्यक्ष गौतम अधिकारी (‘वाई प्लस’) शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री स्वपन देवनाथ, मलय घटक और उदयन गुहा की सुरक्षा में भी कटौती की गई है।

क्यों लिया गया यह फैसला?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में नेताओं को सुरक्षा देने से पुलिस बल पर अत्यधिक दबाव था, जिससे सामान्य कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अब इन पुलिस संसाधनों का उपयोग जनता की सुरक्षा के लिए बेहतर तरीके से हो सकेगा।

जानिए क्या होती हैं सुरक्षा श्रेणियां (Security Categories)?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा ‘खतरे के आकलन’ (Threat Perception) के आधार पर तय होती है, जो इस प्रकार काम करती है:
एक्स (X) श्रेणी: एक सशस्त्र सुरक्षा कर्मी हमेशा तैनात रहता है (शिफ्ट के हिसाब से कुल 3 कर्मी)।
वाई (Y) श्रेणी: दो सशस्त्र सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं (कुल व्यवस्था लगभग 6 कर्मियों की)।
वाई प्लस (Y+): दो सशस्त्र कर्मियों के साथ एक मोबाइल सुरक्षा दल (एस्कॉर्ट) भी शामिल होता है।
जेड (Z) श्रेणी: दो सशस्त्र कर्मी, घर पर स्थायी सुरक्षा और मोबाइल सुरक्षा दल सहित कुल लगभग 14 कर्मी तैनात रहते हैं।
जेड प्लस (Z+): यह सबसे उच्च सुरक्षा व्यवस्था है जिसमें लगभग 40 पुलिसकर्मी तैनात होते हैं (जो वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास है)।

कौन लेता है यह फैसला?
सुरक्षा देने या हटाने का निर्णय ‘राज्य सुरक्षा समीक्षा समिति’ करती है। इस उच्च स्तरीय समिति में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), सुरक्षा निदेशक और खुफिया विभाग के प्रमुख शामिल होते हैं।

प्रशासन के अनुसार, आने वाले समय में केवल सीमित और महत्वपूर्ण पदों जैसे— DGP, कोलकाता पुलिस आयुक्त, मुख्य सचिव, गृह सचिव और मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकारों को ही विशेष सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जाएगी।

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