शिमला । देवभूमि हिमाचल प्रदेश में ‘चिट्टे’ (सिंथेटिक ड्रग्स) का काला कारोबार अब सरकारी गलियारों तक पहुंच गया है। प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए उन सरकारी कर्मियों पर सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है, जो इस अवैध धंधे में शामिल थे। अब तक 123 कर्मचारियों पर नकेल कसी गई है, जिनमें से 31 को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है।
विभागों में हड़कंप: पुलिस से लेकर बिजली बोर्ड तक शामिल
नशा तस्करी में केवल पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विभागों के कर्मचारी भी संलिप्त पाए गए हैं। कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:
कुल बर्खास्तगी: 31 कर्मचारी (21 पुलिस कर्मी और 10 अन्य सरकारी कर्मचारी)।
रडार पर विभाग: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC), खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, ग्रामीण विकास विभाग, बिजली बोर्ड, जल शक्ति विभाग और पशुपालन विभाग।
बैंकिंग क्षेत्र: इस काले कारोबार की आंच बैंकिंग सेक्टर तक भी पहुंची है, जहाँ एक कर्मचारी पर कार्रवाई हुई है।
नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के आंकड़े
वर्ष 2023 से अब तक के आंकड़े प्रदेश में नशे की भयावहता और सरकार की सख्ती को दर्शाते हैं:
कुल मामले: NDPS एक्ट के तहत 6,811 केस दर्ज (पिछली सरकार की तुलना में 33% अधिक)।
गिरफ्तारियाँ: 10,357 आरोपी सलाखों के पीछे।
बरामदगी: 45,867 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त।
234 पंचायतें ‘अति संवेदनशील’ घोषित
सरकार ने प्रदेश की 234 पंचायतों को नशे के लिहाज से रेड जोन (अति संवेदनशील) में रखा है। यहाँ पुलिस और CID की विशेष टीमें 24 घंटे निगरानी कर रही हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बिलासपुर (27), कुल्लू (28) और बद्दी (26) जैसी पंचायतें शामिल हैं।
सरकारी प्रवक्ता का बयान: “नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली सरकारी कर्मचारी क्यों न हो। विभाग के अंदर सफाई अभियान जारी रहेगा।”

